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ये है महादेव की अदालत,यहां जज बन भोलेनाथ सुनते हैं मामले और सुनाते है अपना फैसला

ये है महादेव की अदालत,यहां जज बन भोलेनाथ सुनते हैं मामले और सुनाते है अपना फैसला

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ये है महादेव की अदालत,यहां जज बन भोलेनाथ सुनते हैं मामले और सुनाते है अपना फैसला

ग्वालियर। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि है जो इस साल 4 मार्च को है। इस दिन माता पार्वती तथा भगवान शिव का विवाह हुआ था। लेकिन इस साल इस पर्व के दिन कई शुभ योग एक साथ पड़ रहे है। महाशिवरात्रि के अवसर पर हम आज आपको भगवान शिव के उस रूप से रूबरू कराने जा रहे हैं,जो शायद ही पूरे विश्व में कहीं और ही मिले। शहर से कुछ किलोमीटर दूर गिरगांव में भगवान महादेव का 1000 साल पुराना दिव्य मंदिर हैं। जहां भगवान महादेव एक देवता ही नहीं बल्कि न्यायमूर्ति महादेव के रूप में विराजे हैं।

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इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां शिवरात्रि पर बकायदा महादेव की अदालत लगती है। भगवान भोलेनाथ स्वयं लोगों के मामले सुनते हैं और उन पर फैसला भी सुनाते हैं। इस फैसले के खिलाफ कोई भी नहीं जाता। इतन ही नहीं पूरा गांव और आसपास के राज्यों से आने वाले लोग महादेव के फैसले को मानते हैं। लोगों का मानना है कि महादेव का फैसला ही आखिरी होता है। तो आइए जानते है क्या है इस मंदिर की खासीयत।

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शिवरात्रि पर लगती है भगवान की कचहरी
महाशिवरात्रि पर गिरगांव के इस मंदिर में विशाल मेले का आयोजन होता है। इसके साथ ही यहां महादेव की कचहरी लगती है। बकायदा यहां पंच बैठते हैं और मामलों को सुना जाता है। दोनो पक्षों के द्वारा दलीलें प्रस्तुत की जाती हैं। आखिर में भगवान महादेव न्यायमूर्ति बनकर अपना फैसला सुनाते हैं। महादेव की ओर से पंचों द्वारा सुनाया गया ये फैसला ही लोगों के लिए आखिरी होता है। इस मंदिर की मान्यता ऐसी है कि इसे फैसले के बाद कभी कोई कहीं अपील नहीं करता है।

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एक हजार से ज्यादा मामलों में फैसला सुना चुके हैं भोलेनाथ
मंदिर से जुड़े लोग और गांववासी बताते हैं कि यहां सोमवार को भव्य पूजा की जाती है और महादेव की अदालत लगती है। कोई भी व्यक्ति जब भी चाहे महादेव की कचहरी में अपील कर सकता है। बताया जाता है कि लोगों की इस मंदिर के प्रति आस्था बहुत गहरी है,इसलिए लोग अपने झगड़े लेकर महादेव के पास आते हैं। यहां अभी तक महादेव 1000 से ज्यादा फैसले सुना चुके हैं। हर महाशिवरात्री को यहां बड़ी अदालत लगती है और भारी संख्या में लोग यहां दर्शन करने आते है।

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1000 साल पुराना है स्वयं-भू शिवलिंग
मंदिर से जुड़े लोग बताते हैं कि ये शिवलिंग स्वयं-भू है और करीब 1000 साल पुराना है। इस मंदिर का गुर्जर समाज में बहुत महत्व है। गुर्जर समाज के लोगों में गिरगांव के महादेव में इतनी गहरी आस्था है कि यहां खाई गई कसम को कोई भी झूठा करार नहीं दे सकता। ऐसे किस्से भी है कि जिसने यहां झूठी कसम खाई है उसका हश्र बहुत बुरा हुआ है।

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ये मामले आते है यहां
शहर से सटे गिरगांव के महादेव की गुर्जर समाज के लोगों में काफी मान्यता है। सिर्फ प्रदेश के ही नहीं बल्कि राजस्थान,यूपी और गुजरात से भी लोग यहां महादेव की कोर्ट में अपने मामले लेकर आते हैं। बताते हैं कि महादेव की कोर्ट में ऐसे मामले ज्यादा आते हैं जिसके किसी पक्ष को दूसरे पक्ष पर हत्या, चोरी,षडयंत्र का शक हो। महादेव की कसम खाने के बाद लोगों को उनकी बात पर यकीन हो जाता है। आजकल पारिवारिक कलेश और ऐसे मामले में काफी संख्या में आ रहे हैं।

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