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जयकारों के साथ किया भगवान शांतिनाथ का कलशों से महामस्तकाभिषेक

- पनिहार शांतिगिरी प्राचीन अतिशय क्षेत्र आमीगांव में हुआ विजयश्री विधान

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जयकारों के साथ किया भगवान शांतिनाथ का कलशों से महामस्तकाभिषेक

जयकारों के साथ किया भगवान शांतिनाथ का कलशों से महामस्तकाभिषेक

ग्वालियर. पनिहार के समीप प्राचीन अतिशय क्षेत्र शांतिगिरी आमीगांव में जैन विहसंत सागर एवं विश्वसाम्य सागर के सानिध्य में मंगलवार को महामस्तिकाभिषेक व 16 मंडलीय विजयश्री महामंडल विधान महोत्सव संपन्न हुआ। यहां 1500 सौ वर्ष पुरानी प्रतिमा भगवान शांतिनाथ, भगवान आदिनाथ, भगवान कुंथुनाथ, भगवान आहारनाथ की मनोहारी, खड्गासन प्रतिमाओं का स्वर्ण कलशों से अभिषेक किया गया। केसरिया वस्त्र धारण किए हुए श्रद्धालु प्रथम तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का अभिषेक करने के लिए उतावले हो रहे थे। कार्यक्रम में ससंघ से पूर्व विधायक नीटू सिकरवार, पार्षद हेमलता धर्मेंद्र जैन ने श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद लिया।

जैन तीर्थ हमारे देश की संस्कृति के माथे के तिलक
जैन मुनि विहसंत सागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जैन तीर्थ हमारे देश की संस्कृति के माथे के तिलक होते हैं। इसमें प्राचीन तीर्थ तो देश की वह धरोहर है जिनकी कीमत तो केवल श्रद्धालुओं द्वारा तीर्थ वंदना की जाने वाले अनन्तानंत श्रद्धाभक्ति के भावों से पहचानी जा सकती है। अंतरंग भावों से की गई भक्ति आध्यात्मक और ध्यान के रंगों से सराबोर कर देती है।

इंद्रों ने कलशों से किया भगवान जिनेंद्र का अभिषेक
महोत्सव के विधानचार्य संदीप जैन व चंद्रप्रकाश जैन ने मंत्रोच्चारण के साथ इंद्रों ने कलशों में शुद्धजल भरकर भगवान जिनेंद्र का जयकारों के साथ अभिषेक किया। 16 मंडलीय विजयश्री महामंडल विधान में इंद्र-इंद्राणियों ने पीले वस्त्र धारण कर सिर पर मुकुट और गले में माला पहनकर भक्तिभाव के साथ पूजा अर्चना कर सिध्दप्रभू की आराधना करते हुए महाअघ्र्य भगवान जिनेन्द्र को समर्पित किए। कार्यक्रम में ग्वालियर, भिंड, मुरैना, घाटीगांव, डबरा, इटावा, गोरमी आदि जगहों के श्रद्धालुओं ने जैन मुनि को श्री फल भेंट कर आर्शीवाद लिया।