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पहली बार व्हाइट टॉपिंग की एंट्री : 23.29 करोड़ में जलभराव वाली 6 सड़कों का होगा कायाकल्प

नगरीय प्रशासन आयुक्त ने बैठक में चर्चा के बाद दी स्वीकृति हर बारिश में गड्ढों और जलभराव से जूझने वाले शहर को अब बड़ी राहत मिलने वाली है। नगर निगम पहली बार व्हाइट टॉपिंग तकनीक से सड़कों का निर्माण करने जा रहा है। करीब 23 करोड़ 29 लाख रुपए की लागत से शहर की छह […]

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Gwalior Municipal Corporation

ट्रांसपोर्ट नगर की जर्जर सडक़।

नगरीय प्रशासन आयुक्त ने बैठक में चर्चा के बाद दी स्वीकृति

हर बारिश में गड्ढों और जलभराव से जूझने वाले शहर को अब बड़ी राहत मिलने वाली है। नगर निगम पहली बार व्हाइट टॉपिंग तकनीक से सड़कों का निर्माण करने जा रहा है। करीब 23 करोड़ 29 लाख रुपए की लागत से शहर की छह प्रमुख सड़कों को इस आधुनिक तकनीक से बनाया जाएगा, जिसकी डीपीआर तैयार हो चुकी है और नगरीय प्रशासन आयुक्त से हरी झंडी भी मिल गई है। पहले चरण में पूर्व विधानसभा क्षेत्र की चार और ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र की दो सड़कों को शामिल किया गया है। खास बात यह है कि ये सभी सड़कें ऐसी हैं, जहां बारिश के दौरान सबसे ज्यादा जलभराव होता है और हर साल मरम्मत के बाद भी स्थिति जस की तस बनी रहती है। नगर निगम ने अन्य सड़कों के लिए भी सर्वे तेज कर दिया है। अब तक 44 सड़कों का सर्वे पूरा हो चुका है और कुल 55 सड़कें इस लिस्ट में शामिल होने वाली हैं। बता दें कि 25 मार्च को नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे ने अफसरों से शहर की सडक़ों के बारे में चर्चा हुए छह सडक़ों को व्हाइट टॉपिंग पद्धति से बनाने के लिए स्वीकृति दी है। यह सडक़े करीब 23 करोड़ 29 लाख रुपए की बताई गई है। हालाकि अभी राशि नहीं मिली है, लेकिन राशि स्वीकृति होने के बाद इन सडक़ों का भूमि पूजन के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।

क्यों खास है यह प्रोजेक्ट
ग्वालियर में सड़कों की खराब गुणवत्ता को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। अब व्हाइट टॉपिंग तकनीक के जरिए इस समस्या का स्थायी समाधान तलाशने की कोशिश की जा रही है। इस तकनीक से बनी सड़कें 10 से 15 साल तक टिकाऊ मानी जाती हैं, जिससे बार-बार मरम्मत और खर्च पर भी रोक लगेगी।

जलभराव वाली सड़कों पर फोकस
जिन सड़कों का चयन किया गया है, वे अभी ठीक हालत में हैं, लेकिन बारिश में पानी भरने से जल्दी खराब हो जाती हैं। यही वजह है कि इन मुख्य मार्गों को प्राथमिकता दी गई है। निर्माण के साथ ही जल निकासी के लिए नालियों का भी निर्माण किया जाएगा, ताकि समस्या जड़ से खत्म हो सके।

ऐसे होगा निर्माण
व्हाइट टॉपिंग के तहत सड़क की पुरानी डामर परत हटाकर उस पर करीब 8 इंच मोटी कंक्रीट की लेयर डाली जाएगी। इससे सड़क मजबूत, टिकाऊ और लंबे समय तक बिना टूट-फूट के बनी रहेगी।

ये सड़कें होंगी व्हाइट टॉपिंग से तैयार
हजीरा चौराहे से बिरला नगर पुल तक -1220 मीटर, दोनों तरफ 7.5 मीटर चौड़ी, लागत 4 करोड़ 29 लाख 15,355 रुपये
हजीरा चौराहे से चार शहर का नाका तक -538 मीटर, दोनों तरफ 5.5 मीटर, लागत 97 लाख 93,570 रुपये
एसपी ऑफिस से सिल्वर एस्टेट तक -1300 मीटर, दोनों तरफ 5.5 मीटर, लागत 3 करोड़ 59 लाख 20,351 रुपये
होटल सनबीम से मानसिंह चौराहा तक -750 मीटर, एक तरफ 7 मीटर, लागत 1 करोड़ 57 लाख 61,631 रुपये
सिधिया स्टेच्यू (दीनदयाल नगर) से टाइगर चौक शताब्दीपुरम तक -700 मीटर, 7 और 5.5 मीटर दोनों तरफ, लागत 6 करोड़ 1 लाख 87,352 रुपये
शताब्दीपुरम टाइगर चौक से दाने बाबा चौराहे तक -620 मीटर, दोनों तरफ 7 मीटर, लागत 3 करोड़ 27 लाख 97,106 रुपये

अभी इंतजार फंड का
हालांकि परियोजना को स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन अभी फंड जारी होना बाकी है। भोपाल से राशि स्वीकृति का पत्र मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी और भूमिपूजन के बाद काम धरातल पर उतरेगा।

जलभराव से निपटने के लिए छह सडक़े व्हाइट टॉपिंग बनाई जाएगी,इसकी स्वीकृति भी मिल चुकी है। जलभराव वाले प्रमुख मार्गों की डीपीआर तैयार कर ली गई है और अन्य सडक़ों का सर्वे भी तेजी से किया जा रहा है। इस नई तकनीक से ग्वालियर की सडक़ों की तस्वीर बदलेगी और हर बारिश में होने वाली परेशानी से शहरवासियों को राहत मिलेगी।
संघ प्रिय, आयुक्त नगर निगम