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ग्वालियर नगर निगम में अधिकारियों की कमी, कई विभाग प्रभारियों के भरोसे, इसलिए काम की रफ्तार सुस्त

शहर की बिजली, पानी, सफाई, संपत्तिकर और जलकर वसूली जैसी जरूरी सेवाएं बड़ी संख्या में आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रही हैं। जबकि कई महत्वपूर्ण विभाग स्थायी अधिकारियों के अभाव में प्रभारियों के भरोसे चल रहे हैं।

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ग्वालियर नगर निगम में अधिकारियों की कमी, कई विभाग प्रभारियों के भरोसे, इसलिए काम की रफ्तार सुस्त

ग्वालियर नगर निगम में अधिकारियों की कमी, कई विभाग प्रभारियों के भरोसे, इसलिए काम की रफ्तार सुस्त

ग्वालियर. स्मार्ट सिटी का तमगा हासिल कर चुके ग्वालियर में नगर निगम की व्यवस्थाएं इन दिनों गंभीर प्रशासनिक संकट से गुजर रही हैं। शहर की बिजली, पानी, सफाई, संपत्तिकर और जलकर वसूली जैसी जरूरी सेवाएं बड़ी संख्या में आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रही हैं। जबकि कई महत्वपूर्ण विभाग स्थायी अधिकारियों के अभाव में प्रभारियों के भरोसे चल रहे हैं। ऐसे में शहर की नागरिक सुविधाओं और विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
नगर निगम के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक निगम में कुल 7,020 कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें मात्र 1,600 नियमित कर्मचारी हैं, जबकि 2,450 विनियमित और 2,970 आउटसोर्स कर्मचारी हैं। यानी निगम की लगभग आधी व्यवस्था अस्थायी कर्मचारियों पर टिकी है।

तकनीकी विभागों में सबसे ज्यादा चिंताजनक
स्थिति सबसे ज्यादा ङ्क्षचताजनक तकनीकी विभागों में है। जनकार्य, विद्युत, कार्यशाला और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) जैसे करोड़ों रुपए के बजट वाले विभागों में स्थायी अधीक्षण यंत्री तक नहीं हैं। इन विभागों का संचालन प्रभारी अधिकारियों के भरोसे हो रहा है। इसका असर योजनाओं की स्वीकृति, विकास कार्यों की निगरानी और शिकायतों के त्वरित निराकरण पर साफ दिखाई देता है।

खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ता
शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, सफाई प्रबंधन और कर वसूली जैसे सीधे जनता से जुड़े विभागों में आउटसोर्स कर्मचारियों की बड़ी भूमिका है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित वेतन और नौकरी की अनिश्चितता के कारण जवाबदेही का स्तर प्रभावित होता है, जिसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ता है।
स्वच्छता सर्वेक्षण के बीच इस स्थिति से सवाल खड़े हो रहे
मानसून, स्वच्छता सर्वेक्षण और बढ़ती शहरी आबादी के बीच नगर निगम की यह स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है। यदि जल्द ही तकनीकी अधिकारियों और नियमित कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं हुई, तो शहर की नागरिक सेवाओं पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। शहरवासियों को अब इस बात का इंतजार है कि नगर निगम को ‘प्रभारी संस्कृति’ और आउटसोर्स निर्भरता से कब मुक्ति मिलेगी।

निगम में स्टाफ और अधिकारियों की कमी है। रिक्त पदों की पूर्ति के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है और नियुक्ति संबंधी निर्णय राज्य शासन के स्तर पर होना है।
संघप्रिय, आयुक्त नगर निगमालियर