जैन धर्म का संस्थापक यूं तो ऋषभदेव को माना जाना है, लेकिन वास्वविक रूप से जैन धर्म को आकार देना का श्रेय महावीर स्वामी को जाता है। जैन धर्म को ये नाम भी महावीर स्वामी की देन है। अपनी कठोर तपस्या के बाद ऋजुपालिका नदी के तट पर उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। कठिन तपस्या के दौरान उन्होंने अपनी इन्द्रियों और परिस्थितियों पर अद्भुत नियत्रंण प्राप्त किया। इन्द्रियों पर विजय प्राप्त करने के कारण उन्हें जिन यानि की विजेता कहा गया। जिसके बाद महावीर स्वामी जिन कहलाए और उनके अनुयायियों को जैन कहा जाने लगा।