
दो दिन दवाई फिर जमकर पिटाई, नशे की लत तो नहीं छूटी, थमा दी गई सांसे
ग्वालियर। शहर में संचालित नशा मुक्ति केन्द्रों पर नशे की लत छुड़ाने के नाम पर हजारों रुपए फीस वसूल की जाती है, लेकिन नशा छुड़ाने के लिए दवाएं देने के बजाय बेरहमी से मारपीट कर यातनाएं दी जाती हैं और उनसे झाड़ू पोंछा कराने के साथ शौचालय तक साफ कराए जाते हैं। खास बात यह है कि शहर में संचालित 8 नशा मुक्ति केन्द्रों में से सिर्फ 3 ही मान्यता प्राप्त हैं, बाकी अवैध रूप से चल रहे हैं।
रविवार को सागरताल रोड पर संचालित जिस न्यू लाइफ नशा मुक्ति केन्द्र में नशा पीडि़त अंडा कारोबारी की कर्मचारियों द्वारा की गई मारपीट से मौत हुई, वह भी बिना मान्यता के अवैध रूप से चल रहा था। सामाजिक न्याय विभाग के अधीन आने वाले नशा मुक्ति केन्द्रों में नशा पीडि़तों को यातनाएं देने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं, लेकिन अधिकारी इन पर कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधे रहे। रविवार को पीडि़त युवक की मौत हो गई तब अधिकारी कह रहे हैं कि केन्द्रों की जांच कराएंगे।
न्यू लाइफ नशा मुक्ति केन्द्र में करीब ढाई साल पहले भी झांसी से नशे की लत छुड़ाने के लिए आए युवक की भी संदिग्ध हालात में मौत हुई थी। परिजन ने संचालक सहित स्टाफ पर हत्या का आरोप लगाया था। अब फिर दोबारा पीडि़त की हत्या का मामला सामने आया है। सूत्रों का कहना है कि केन्द्र संचालक की राजनीतिक रसूखदारों से पैठ है, इसलिए हर बार केन्द्र संचालक और उसके कर्मचारी बचते रहे हैं।
सिर्फ दो दिन दवा, फिर पिटाई
नशे की लत छुड़ाने के लिए परिजन विदिशा से यहां लाकर भर्ती कर गए। 10 दिन से यहां बंद हूं। केन्द्र में भर्ती लोगों की हालत जेल से बदतर है। मुझे भी भर्ती करते समय कहा था कि दवाओं से इलाज होगा, फिर नशा नहीं करोगे, लेकिन सिर्फ दो दिन रात में एक गोली दी गई, संभवत: वह नींद की गोली थी। उसके बाद नशे की तलब होने पर केन्द्र के स्टाफ को परेशानी बताई तो मुझे भी बेहरमी से पीटा। इलाज के नाम पर परिजन से 7 हजार रुपए वसूले गए हैं। उसके बावजूद सुबह झाडू, पोंछा सहित तमाम काम कराए जाते हैं। शौचालय भी नशा पीडि़तों को ही साफ करने पड़ते हैं। काम करने से मना करने पर पीटा जाता है। पीडि़तों की हालत जानवरों से बदतर है। हमारे सामने इमरान को रात में और सुबह पीटा गया था। उसके हाथ पैर बांध दिए थे। वह चीख रहा था, लेकिन पीटने वालों को दया नहीं आई। जब भांप गए कि उसकी मौत हो गई तो हम सबको केन्द्र से निकाल कर ताला डालकर भाग गए।
( जैसा कि न्यू लाइफ नशा मुक्ति केन्द्र में भर्ती पीडि़त ने पत्रिका को बताया)
शुरू कराएंगे मॉनीटरिंग
सीधी बात : संजीव खेमरिया, संयुक्त संचालक-सामाजिक न्याय विभागॉनीटरिंग
प्रश्न: नशामुक्ति केन्द्रों में पीडि़तों को प्रताडि़त करने की घटनाएं लगातार सामने आती हैं, विभाग क्या कर रहा है?
उत्तर: शहर में गैर अनुदान प्राप्त केन्द्र अधिक हैं, हम उनकी जांच शुरू करा रहे हैं। प्रशासन और पुलिस का भी जांच में सहयोग लिया जाएगा।
प्रश्न: शहर में चल रहे केन्द्रों पर विभाग की मॉनीटरिंग क्यों नहीं है?
उत्तर: मुझे मार्च में चार्ज मिला है, मेरी जानकारी के अनुसार अभी विभाग से मंथन, प्रतिज्ञा और संस्कार इन तीन नशामुक्ति केन्द्रों को ही मान्यता है, बाकी के केन्द्र मान्यता प्राप्त नहीं हैं।
प्रश्न: रविवार को एक व्यक्ति की जान चली गई, इस घटना पर विभाग ने क्या किया है?
उत्तर: घटना की जानकारी मिलने के बाद तहसीलदार के साथ विभागीय अधिकारी को भेजकर कार्रवाई कराई है। एफआईआर भी हो गई है।
प्रश्न: विभाग इस घटना के बाद अब क्या करेगा, पूर्व की तरह यह मामला भी फाइलों में दबकर तो नहीं रह जाएगा?
उत्तर: हम मॉनीटरिंग शुरू करा रहे हैं। यह देखा जाएगा कि नशामुक्ति केन्द्रों पर बगैर स्वास्थ्य विभाग की अनुमति के दवाएं कैसे दी जा रही हैं। यह भी देखेंगे कि केन्द्रों पर विशेषज्ञ चिकित्सक परामर्श और जांच के लिए आते हैं कि नहीं।
प्रश्न: बिना मान्यता के चल रहे नशामुक्ति केन्द्रों पर आगे क्या कारवाई होगी
उत्तर: जो संस्थाएं बिना मान्यता के केन्द्र चला रहीं हैं, उनके सभी दस्तावेजों का परीक्षण कराएंगे, इसके बाद अगर किसी भी तरह की असंवैधानिक गतिविधि मिली तो उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज कराए जाएंगे।
Published on:
24 Jun 2019 02:22 pm
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