ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय मेडिकल साइंस के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने जा रहा है। इसके लिए विश्वविद्यालय में मेडिकल साइंस संस्थान स्थापित किया जाएगा। यह संस्थान मेडिकल के क्षेत्र में नई चुनौतियों तथा जटिल रोगों पर शोध कार्य करेगा। इसके लिए मेडिकल कॉलेज और आयुर्वेदिक कॉलेज का संपूर्ण प्लान भी तैयार किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय के टण्डन सभागार में मंगलवार को संपन्न हुई महत्वपूर्ण बैठक में इस संबंध में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार-विमर्श के बाद अंतिम रूप लिया गया।
तीन अस्पतालों से होगा एमओयू: मेडिकल हॉस्पिटल खोलने के लिए 300 बैड का अस्पताल होना आवश्यक है। इसकी पूर्ति करने के लिए बिरला हॉस्पिटल, कैंसर हॉस्पिटल तथा जिला अस्पताल मुरार से एमओयू की इसकी पूर्ति की जाएगी।
विश्वविद्यालय की अध्ययनशालाओं में ह्यूमन एनाटोमी, फिजियोलॉजी तथा बायोकेमिस्ट्री तीन वर्षीय पाठ्यक्रम की शुरूआत की जाए जिससे कि मेडिकल कॉलेज में मूलभूत विषयों में प्राध्यापकों की पूर्ति हो सकेगी। ये नई एमसीआई गाइड लाइन के अनुसार होगा।
रिटायर्ड डॉक्टर रखे जाएंगे: संस्थान में मेडिकल कॉलेज से सेवानिवृत्त डॉक्टरों को रखा जा सकता है। इस प्रकार संस्थान में नए लोगों के लिए कोई अवसर नहीं होगा।
बैठक में कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला, कुलसचिव प्रो. आनंद मिश्रा, मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन डॉ. एसआर अग्रवाल, जेएएच के पूर्व अधीक्षक डॉ एसएम तिवारी, शिवपुरी मेडिकल कॉलेज की डीन व केआरएच की महिला रोग विभाग अध्यक्ष डॉ ज्योति बिंदल, कैंसर चिकित्सालय के डायरेक्टर डॉ बीआर श्रीवास्तव, बिरला हॉस्पिटल के न्यासी वासुदेव डालमिया, डॉ हरिमोहन गोस्वामी, प्रो एसके द्विवेदी, प्रो डीडी अग्रवाल एवं प्रो डीसी तिवारी मुख्य रूप से उपस्थित थे।
मेडिकल व आयुर्वेदिक कॉलेज बनेंगे
बैठक मेडिकल कॉलेज का प्रोजेक्ट बनाने के लिए प्रो एके गोविला को प्रोजेक्ट डायरेक्टर एवं प्रो. डॉ. एसएम तिवारी को वर्तमान परिस्थितियों का संचालन करने के लिए समन्वयक नियुक्त किया गया। आयुर्वेदिक कॉलेज का प्लान बनाने के लिए 44 हजार वर्गफुट भवन तथा सात एकड़ जमीन की व्यवस्था के लिए एवं इसका संपूर्ण प्लान बनाने के लिए प्रो. सीपी शर्मा को अधिकृत किया गया है।