
विधानसभा चुनाव में टकराव तो भाजपा और कांग्रेस के बीच है, लेकिन दूसरे दल भी इन दिग्गज दलों की परेशानी बढ़ा सकते हैं। इनमें बसपा और आम आदमी पार्टी इस बार पूरी ताकत से दम दिखाने के लिए ताल ठोक रही हैं। आप दिल्ली और पंजाब के कार्ड पर मतदाताओं को रिझाने की तैयारी में हैं, जबकि बसपा पारंपरिक वोटों के अलावा क्षेत्रीय दलों का सहारा लेगी। हालांकि आप (आम आदमी पार्टी ) ने पिछले चुनावों का गणित समझ कर इस बार रणनीति बदली है। उधर अंचल में बसपा का चुनावी इतिहास चौंकाने वाला रहा है। 2018 के चुनावों में बसपा ने भिंड में बाजी मारी थी। जबकि ग्वालियर ग्रामीण, जौरा और पोहरी में दूसरे नंबर पर रही थी। वह 26 सीटों पर तीसरे पायदान पर रही।
राजनीति के जानकार कहते हैं, दोनों दल (बसपा और आप) खेल बिगाड़ने की तासीर से चुनावी मैदान में उतरने का दम भर रहे हैं। हालांकि अभी तक के रिकाॅर्ड में दोनों दलों की मजबूती का फायदा भाजपा को ही मिला है। अंचल की बात करें तो 2008 और 2013 के चुनावों में बसपा को ज्यादा वोट मिले थे। दोनों बार भाजपा प्रदेश की सत्ता पर काबिज हुई। इन दोनों चुनावों की तुलना में पिछले चुनाव (2018) में बसपा को कम मत मिले, तब कांग्रेस मजबूत रही। उधर पंजाब और दिल्ली में आप की मजबूती का नुकसान कांग्रेस को हुआ है।
इस आधार ताकत का दावा
आप से बसपा का वोट बैंक अभी तक ज्यादा रहा है। इसके पीछे अंचल का काफी हिस्सा उत्तरप्रदेश से सटा होना है। जबकि आप का फोकस युवा और समाज के कमजोर मतदाताओं पर ज्यादा है।
बसपा ने ग्वालियर ग्रामीण से सुरेश बघेल को उतारा
आप की चौथी सूची आज शाम तक
ग्वालियर। बसपा ने ग्वालियर ग्रामीण से सुरेश बघेल को चुनाव मैदान में उतारा है। इससे पहले ग्वालियर विधानसभा से शत्रुघ्न यादव को टिकट दिया चुका है। अब ग्वालियर दक्षिण, ग्वालियर पूर्व, डबरा और भितरवार से उम्मीदवारों के नाम तय होना बाकी है।
Updated on:
23 Oct 2023 07:36 am
Published on:
23 Oct 2023 07:27 am
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