
MP News: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत तय समय सीमा में आम नागरिकों को सेवाएं न उपलब्ध कराना जिले के आठ अधिकारियों और कर्मचारियों को भारी पड़ गया। कलेक्टर रुचिका चौहान ने सभी को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं और स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
शासन की योजनाओं और सेवाओं को तय समय में जनता तक पहुंचाने के उद्देश्य से लोक सेवा गारंटी अधिनियम लागू किया गया है। इस कानून के तहत प्रत्येक सेवा के लिए निश्चित समय सीमा निर्धारित है। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी समय पर सेवा उपलब्ध नहीं कराता है, तो उसके खिलाफ प्रतिदिन 250 रुपए के हिसाब से अर्थदंड लगाने का प्रावधान है। कलेक्टर ने समीक्षा के दौरान पाया कि कई मामलों में तय समय सीमा के भीतर सेवाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं।
इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। जिन अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए है, उनमें बृजकिशोर शर्मा (सीएमओ, आंतरी), ज्ञान सिंह रावत (सचिव, ग्राम पंचायत पलायझा, भितरवार), कृष्ण कुमार भोला (नायब तहसीलदार, मोहना), महेश कुशवाह (तहसीलदार, लश्कर), मस्तराम गुर्जर (नायब तहसीलदार, बिलौआ), पूजा मावई (नायब तहसीलदार, आंतरी), प्रदीप महाकाली (नायब तहसीलदार, कुलैथ) और प्रेम चंद्र शाक्य (सचिव, ग्राम पंचायत स्याऊ, भितरवार) शामिल है।
Published on:
08 Mar 2026 03:40 pm
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