
ग्वालियर। बड़े राजनीतिक विवाद का जिला प्रशासन ने तकनीकी हल खोजा है। नाथूराम गोडसे की प्रतिमा लोकार्पण शब्द में फंस गई है। कानून के जानकारों के अनुसार, मप्र सार्वजनिक स्थान (धार्मिक भवन और गतिविधियों का विनियमन) अधिनियम 2001 की धारा 11 के तहत दंडनीय है। बिना इजाजत प्रतिमा को लोक (पब्लिक) को अर्पित कैसे किया यह उन्हें बताना होगा। सटीक जवाब नहीं दिया तो धारा ६ के तहत प्रशासन प्रतिमा हटा सकता है।
एडीएम शिवराज वर्मा ने महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयवीर भारद्वाज को जो नोटिस दिया है, वह भी इसी कार्रवाई की ओर जाता है। पूछा गया है कि महासभा के दौलतगंज कार्यालय में नाथूराम गोडसे की प्रतिमा पूजा अर्चना कर, उसे गोडसे मंदिर का नाम देकर मंदिर का लोकार्पण किया गया। कार्यालय के बाहर बैनर पर 'हिंदु महासभा भवन' हुतात्मा नाथूराम गोडसे मंदिर लिखा है।
यह भी लिखा है, आपके द्वारा उक्त मंदिर निर्माण बिना किसी सक्षम अनुमति के अवैध रूप से किया। यह कृत्य मप्र सार्वजनिक स्थान अधिनियम के तहत अवैधानिक है। प्रशासन और पुलिस अधिकारी कहते हैं महासभा के नेताओं की ओर से नोटिस का जवाब आने का इंतजार है। उधर कोतवाली टीआई दामोदर गुप्ता का कहना है हिंदु महासभा के कार्यालय पर विवाद न हो इसलिए पुलिस निगरानी कर रही है।
राजनीतिक एंगल?
महासभा ने गोडसे की प्रतिमा रखकर उसे मंदिर क्यों बनाया, पुलिस और खुफिया एजेंसियां वजह पता लगाने में जुटी हैं। इसलिए दौलतगंज में हिमस के दफ्तर और नेताओं पर नजर रखने के लिए मुखबिर फिट किए हैं। गोडसे के इस मंदिर में आने जाने वालों को भी परखा जा रहा है। खुफिया सूत्रों का कहना है प्रदेश में अगले साल चुनाव होंगे। इसलिए प्रतिमा की स्थापना को राजनीतिक नजरिए से भी परखा जा रहा हैं।
Published on:
20 Nov 2017 09:50 am
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