11 फ़रवरी 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ये है MP का नया हिल स्टेशन, यहां की खूबसूरत वादियां देखकर ऊटी पंचगनी भूल जाएंगे देखे PHOTOS

फूलों से लदी हरी भरी घाटियां, कई किलोमीटर तक फैला हुआ घना जंगल और प्रकृति के बीच एक खूबसूरत का पर्यटन स्थल। ये सब सुनकर आपके मन में किसी हिल स्टेशन की तस्वीर उभर रही होगी। जी आप एकदम सही है। हम बात कर रहे हैं मध्यप्रदेश के नए हिल स्टेशन की।

3 min read
Google source verification

image

shyamendra parihar

Jul 28, 2017

new hill station of madhya pradesh

new hill station of madhya pradesh

ग्वालियर। फूलों से लदी हरी भरी घाटियां, कई किलोमीटर तक फैला हुआ घना जंगल और प्रकृति के बीच एक खूबसूरत का पर्यटन स्थल। ये सब सुनकर आपके मन में किसी हिल स्टेशन की तस्वीर उभर रही होगी। जी आप एकदम सही है। हम बात कर रहे हैं मध्यप्रदेश के नए हिल स्टेशन श्योपुर की। यहां की हरी भरी किसी हिल स्टेशन से कम नहीं है। भले ही सरकार इसे हिल स्टेशन करार न दें लेकिन जो लोग यहां एक बार आते हैं वो ऊटी और पंचगनी की वादियों को भी भूल जाते हैं।


Image may contain: mountain, sky, outdoor and nature

मध्यप्रदेश में चंबल एक बड़े रकबे में फैला जंगल, छोटी-बड़ी पहाडिय़ों की एक सीमित शृंखला और मानसूनी बारिश के बाद जंगल पर छाई हरियाली। कुछ यही परिदृश्य है श्योपुर के जंगल का, जो किसी भी हिलस्टेशन से कम नहीं है। विशेषकर वर्षाकाल में तो श्योपुर का जंगल हरियाली चादर ओढ़े हरा एक अलग सी खुशी देता है। यही वजह है कि न केवल श्योपुर क्षेत्र के लोग बल्कि अन्य जिलों से भी लोग वर्षाकाला में श्योपुर की वादियों को निहारने आते हैं।


Image may contain: plant, tree, sky, outdoor and nature

घने जंगल और पहाडिय़ों से घिरा है श्योपुर
उल्लेखनीय है कि जिले के 60 फीसदी क्षेत्र में जंगल फैला है। जिसके बीच में नोनपुरा घाटी सहित अन्य छोटी-बड़ी पहाडिय़ां जंगल का शृंगार करती प्रतीत होती हैं। हालांकि ग्रीष्मकाल में जंगल क्षेत्र रूखा सूखा लगता है, लेकिन पहली बारिश के साथ ही जंगल में रौनक लौट आती है। कलकल करते छोटे छोटे झरने और पहाडिय़ों के बीच झांकता हरा भरा क्षेत्र किसी हिल स्टेशन की कमी को पूरा करता नजर आता है। हालांकि इस बार मानसून एक माह की देरी हुई,लेकिन बीते एक सप्ताह में जिले में हुई ठीकठाक बारिश के बाद श्योपुर का जंगल एक बार फिर हरा भरा हो गया। जिसके चलते सैलानी पहुंचने लगे हैं।

कूनो ने बढ़ाई पहचान
यूं तो श्योपुर का जंगल अपने आप में अद्वितीय है, लेकिन कूनो अभयारण्य भी इसी जंगल में आरक्षित होने के कारण श्योपुर के वनक्षेत्र को अलग पहचान मिली है। कूनो, सीप, पार्वती, सरारी आदि नदियों के साथ जंगल क्षेत्र श्योपुर की पहचान है। कूनो पूरे भारत में अकेला ऐसा अभ्यारण हैं, जहां गिर के शेरों के रहने के लिए अनुकूल दशाएं हैं। यहां जल्द ही शेरों को बसाया जाएगा, जिसके बाद इसकी शान और भी बढ़ जाएगी।

Image may contain: 1 person, outdoor



पहाड़ों के बीच कई अद्वितीय स्थल करते हैं आकर्षित
जिले के कराहल क्षेत्र में जंगल और पहाड़ों के बीच कई ऐसे दर्शनीय स्थल हैं, जो लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इन्हीं में से डोबकुंड, माढ़ी करार, धोबी कुंडा, देव खो, मराठा खो, लंका खो, नटनी खो, पचमढ़ी खो, तिल्ली खो, पातलगढ़, पीपलबावड़ी, आम झिर, आमेठ किला आदि प्रमुख रूप से शामिल है। देव खो से ग्रीष्मकाल में भी पानी निकलता रहता है।

ये भी खास
06 हजार 606 वर्ग किलोमीटर है जिले का क्षेत्रफल
03 हजार 916 वर्ग किलोमीटर में फैला है जंगल क्षेत्र
1200 वर्ग किलोमीट क्षेत्र कूनो वनमंडल के लिए आरक्षित
345 वर्ग किलोमीटर कूनो अभयारण्य के लिए चिन्हित
50 किलोमीटर दूर है श्येापुर जिला मुख्यालय से कूनो अभयारण्य

Image may contain: one or more people, outdoor and nature

ऐसे पहुंचे श्योपुर
श्योपुर की नेचुरल ब्यूटी को देखने के लिए आप वाया मुरैना या शिवपुरी दोनो ही रास्ते से आ सकते हैं। आप मुरैना या शिवपुरी रेलवे स्टेशन पर उतर कर सड़क मार्ग से श्योपुर-शिवपुरी, गोरस-मुरैना रोड से श्योपुर के जंगलों के स्थलों तक जा सकते हैं।

यहां आज भी चलती है नैरागेज
श्योपुर देश के उन चुनिंदा शहरों में है, जहां आज भी नैरागेज ट्रेन चलती है। ये हिस्टोरिक ट्रेन ग्वालियर से श्योपुर तक जाती है। ये रास्ता जंगल और प्राकृतिक सौंदर्य सये भरी घाटियों से होकर जाता है। ऐसे में इस ऐतिहासिक ट्रेन से आप न केवल हिस्ट्री से खुद को जोड़ पाएंगे, बल्कि खुद को प्रकृति के समीप पाएंगे। ये ट्रेन सिंधिया शासकों ने शुरू करवाई थी।