
dog keepers
ग्वालियर। डॉग (कुत्ता ) बाइट के केस सड़कों पर आवारा घूमने वाले कुत्तों के अलावा पालतू डॉग्स द्वारा भी बढ़ रहे हैं। डॉग पालने वालों के लिए यह चिंता का सबब है। ट्रेनर और पशु चिकित्सक इसके पीछे डॉग्स से ज्यादा उन्हें पालने वालों का दोष बताते हैं। उनका कहना है डॉग्स पालना रसूख बन गया है। लोग खूंखार ब्रीड के डॉग्स पाल तो रहे हैं, लेकिन यह नहीं समझ रहे हैं कि इन्हें कैसे हैंडल करना है, क्या सिखाना है। इसका खामियाजा डॉग्स पालकों को भुगतना पड़ रहा है।
खतरनाक हो गया डॉग, घर में नहीं रखना
पशु चिकित्सक डॉ. आशुतोष गुप्ता कहते हैं, उनके पास लगभग रोज एक-दो डॉग पालक ऐसे आते हैं, जो अपना पालतू डॉग किसी और को देना चाहते हैं। इन लोगों की शिकायत रहती है कि डॉग खतरनाक हो गया है। घर के लोगों को भी काटता है। अब उसे घर में रखना खतरनाक है। कुछ पालकों की शिकायत रहती है, डॉग ट्रेनर भी लगाया था, लेकिन डॉग उसकी बात सुनता है, हमारी नहीं।
इन ब्रीड का चलन
जमर्न शैफर्ड, पिटबुल, रॉटवायलर, अमेरिकन बुली, लैबाडोर सहित कई बड़ी ब्रीड के डॉग्स को पालने का चलन बढ़ा है। इससे देसी डॉग्स पालने की डिमांड घटी है। पशु चिकित्सक कहते हैं कि लोग इन्हें पाल तो लेते हैं, लेकिन पशु चिकित्सक और एक्सपर्ट की सलाह नहीं लेते। इसलिए ज्यादातर लोगों को यह नहीं पता होता कि जिस डॉग को पाल रहे हैं उसका मिजाज क्या है।
इसलिए बढ़ी पालकों की परेशानी
● डॉग्स की ब्रीड, उसे पालने का तरीका समझे बिना डॉग को पालना।
● छोटे बच्चों को पपी से दूर रखना चाहिए, क्योंकि बच्चे तो पपी से खेलते हैं, लेकिन पिल्लों को उससे खीझ होती है। इसलिए वह दिमाग में बैठा लेते हैं कि बच्चे उनके लिए घातक हैं। बड़े होने पर बच्चों पर हमला करते हैं।
● सिर्फ ट्रेनर के भरोसे नहीं छोडें, ट्रेनर जो सिखाता है उसे खुद भी उसी तरह की ट्रेनिंग दें।
Published on:
31 Mar 2023 05:54 pm
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