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ग्वालियर जिला दिव्यांग मित्र घोषित, मगर 152 बूथों पर रैंप नहीं

ढाई साल पहले जिला दिव्यांग मित्र घोषित हो गया है लेकिन इसके बावजूद भी कई मतदान केन्द्रों पर अभी भी रैम्प नहीं बने हैं

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ग्वालियर जिला दिव्यांग मित्र घोषित, मगर १५२ बूथों पर रैंप नहीं

ग्वालियर. तीन साल पहले जिले में बाधारहित वातावरण बनाने के लिए तैयारी शुरू की गई थी।इसके बाद सभी सरकारी कार्यालयों में रैंप बनाने के काम शुरू हुए। एक साल में ही यह सारे रैंप बनवाकर केन्द्र सरकार की टीम से वैरिफिकेशन कराकर जिले को बाधारहित घोषित कर दिया गया था। इसके बाद भी लगभग सभी कार्यालयों की स्थिति दिव्यांगों के लिए बेहतर नहीं है।

विधानसभा-2018 की तैयारियों में लगे प्रशासन ने विधानसभाओं के पूर्व में स्थापित 1723 मतदान केन्द्रों और ही में बनाए गए २ नए केन्द्रों की मैपिंग शुरू की है। इस दौरान तीन विधानसभाओं में मौजूद 152 मतदान केन्द्रों पर अभी तक रैंप नहीं बनाए गए हैं। यह स्थिति तब है, जबकि जिले को बाधा रहित होने का प्रमाण पत्र ढाई साल पहले ही मिल गया था और साल की शुरुआत में राष्ट्रपति की मौजूदगी में जिले को दिव्यांग मित्र भी घोषित किया जा चुका है। अब भारत निर्वाचन आयुक्त के आने को लेकर विभागीय स्तर पर हड़बड़ी में सारे काम कराने की कोशिश की जा रही है, ताकि किरकिरी से बचा जा सके। यही हाल सरकारी कार्यालयों का है, लगभग सभी कार्यालयों में दिव्यांग फ्रेंडली माहौल सिर्फ कागजों में ही नजर आ रहा है। कोई भी दिव्यांग न आसानी से कलेक्टर, अपर कलेक्टर के कक्ष तक पहुंच सकता है और न ही संभागायुक्त कार्यालय में आसानी से पहुंचा जा सकता है।

कलेक्ट्रेट

जनसुनवाई सहित एडीएम, अपर कलेक्टर, महिला बाल विकास, निर्वाचन, मुरार एसडीएम और ग्वालियर सिटी एसडीएम कार्यालयों तक जाने के लिए दिव्यांगों के लिए बाधारहित गेट बनाया गया था। दूसरी मंजिल पर बने इस गेट पर कर्मचारियों की मोटर साइकलों का कब्जा है।

जिला पंचायत परिसर

परिसर में जिप सीईओ कार्यालय के गेट पर रैंप है, लेकिन इस गेट की बनावट सही नहीं होने से दिव्यांगों को ज्यादातर समय ट्राइसाइकल बाहर खड़ी करके ही जाना पड़ता है। जनपद मुरार के कार्यालय, आरईएस कार्यालय और महिला बाल विकास के मुरार विकासखंड कार्यालय की भी स्थिति कमोवेश यही है।

मोतीमहल

परिसर में राजस्व मंडल, भू अभिलेख, आबकारी, परिवहन विभाग के प्रदेश मुख्यालय हैं। संभागायुक्त, महिला बाल विकास, स्कूली शिक्षा, स्वास्थ्य आदि महत्वपूर्ण विभागों के कार्यालय हैं। इन सभी कार्यालयों में दिव्यांगों के लिए सुविधाएं नहीं हैं।