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एनआरआई कोटे की सीट पर दिया देसी को दाखिला

डीमेट के जरिए डॉक्टरी बेचने के धंधे में निजी कॉलेजों ने लगभग हर सीट पर काली कमाई की है। एनआरआई (अप्रवासी भारतीय) की सीट पर देसी छात्रों को एडमीशन दिए गए। इसमें कॉलेजों ने सुप्रीम कोर्ट के नियमों को भी ठेंगा दिखाया।

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Gwalior Online

Jun 09, 2015

NRI quota

NRI quota

-पुनीत श्रीवास्तव-
ग्वालियर। डीमेट के जरिए डॉक्टरी बेचने के धंधे में निजी कॉलेजों ने लगभग हर सीट पर काली कमाई की है। एनआरआई (अप्रवासी भारतीय) की सीट पर देसी छात्रों को एडमीशन दिए गए। इसमें कॉलेजों ने सुप्रीम कोर्ट के नियमों को भी ठेंगा दिखाया।

कोर्ट में हुई दो बार की सुनवाई में 27 मई 2009 को सिविल अपील नंबर 4060/2009 जो मार्डन डेंटल कॉलेज विरुद्व मध्यप्रदेश में फैसला दिया है। निजी कॉलेज निधार्रित सीट में 15 प्रतिशत एनआरआई कोटे, 43 प्रतिशत डीमेट और 42 प्रतिशत राज्य कोटे (व्यापमं से पास छात्रों) से भरेंगे। 12 अगस्त 2005 को सिविल अपील नंबर 5044/2005 की सुनवाई में 5 न्यायधीशों की बेंच भी फैसला दे चुकी है। निजी कॉलेज में 15 प्रतिशत आरक्षित सीटस् पर अप्रवासी भारतीयों के बेटे-बेटियों या उनके ब्लड रिलेटिव (खून के रिश्ते) को ही प्राइवेट कॉलेज एनआरआई कोटे में दाखिला दें। इसमें मेरिट को नजर अंदाज नहीं किया जाए। एनआरआई कोटे के एडमिशन से होने वाली कमाई को आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की पढ़ाई और प्रोत्साहन में खर्च किया जाए। इसके बावजूद प्रावइेट कालेज इन आरक्षित सीटों पर ब्लैक (कालाबाजारी) से देसी छात्रों को बिना पीएमटी और डीमेट दिए दाखिला देते रहे हैं।

एेसे बढ़ाते नंबर

एनआरआई कोटे से सीधे दाखिला देने के लिए छात्र को 12वीं की परीक्षा में 50 प्रतिशत अंक से पास होना अनिवार्य है। एमआईसी (मेडिकल कांउसिल ऑफ इंडिया) के नियमानुसार अंकों का प्रतिशत पीसीबी (फिजिक्स, कैमिस्ट्री और बायलॉजी) में होना चाहिए। लेकिन कमजोर छात्रों को सीधे दाखिला दिलाने के लिए निजी कॉलेज इसमें इंग्लिश विषय के नंबर जोड़ कर पीसीबीई (फिजिक्स, कैमिस्ट्री, बायलॉजी और इंग्लिश) के जरिए प्रतिशत को बढ़ाने में मदद देते हैं।

नहीं मान रहे बदले नियम

निजी कॉलेज में सीट घोटाले की शिकायते सामने आने पर एमसीआई ने एनआरआई सीट पर दाखिले के लिए परीक्षा पास करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन नियम सिर्फ सरकारी मेडिकल कॉलेज में लागू हो रहे हैं कई निजी कॉलेज एमसीआई के नियम नहीं मान रहे हैं।

कीमत 50 से 60 लाख रुपए

प्राइवेट मेडिकल कॉलेज पीएमटी और डीमेट के जरिए दाखिला लेने वाले छात्रों से कॉलेज 25 से 30 लाख रुपए डोनेशन लेते हैं। एनआरआई सीट पर देसी छात्रों को दाखिला देने के एवज में 50 से 60 लाख रुपए वसूलते हैं, क्योंकि इसमें न तो छात्रों को पीएमटी देना होती न ही डीमेट। 12वीं में मेरिट के आधार पर एडमीशन मिलता है।

विधानसभा में उठ चुका मामला

डीमेट में फर्जीवाड़े का मुद्दा विधानसभा के ध्यानाकर्षण में उठाया था। तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी ने भी इसे सही माना था। लेकिन सरकार ने जांच का भरोसा दिलाकर सबूत को झूठा साबित किया था। सच्चाई यह है डीमेट में 90 प्रतिशत फर्जीवाड़ा होता है। इसके जरिए दाखिला लेने वालों की कमाई की जांच होना चाहिए। ईडी को पता लगाना चाहिए कि बच्चों को डॉक्टर बनाने के लिए प्राइवेट कॉलेजों को लाखों रूपए का डोनेशन और फिर लाखों रूपए की फीस देने के लिए अभिभावक कमाई किस जरिए से कर रहे हैं।
-डॉ. गोविंद सिंह, पूर्व गृहमंत्री और लहार विधायक, कांग्रेस