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बरगद के पेड़ में बना है ये अनोखा शिवमंदिर,अज्ञातवास में पांडवों ने यहीं छुपाए से अस्त्र-शस्त्र

प्राचीन बरगद के पेड़ के बीच में भगवान शिव का मंदिर है। जहां आने वाले भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। इस सिद्ध स्थल पर मंदिर के पास ही एक प्राचीन नाला है, जिसमें भीषण गर्मी के समय में भी पानी रहता है।

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shyamendra parihar

Jul 15, 2017

prachin shiv mandir

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ग्वालियर/शिवपुरी। भगवान शिव की नगरी कही जाने वाले शिवपुरी में एक ऐसा अनोखा शिवमंदिर है जो पूरे देश में अद्वितीय है। शिवपुरी शहर से 3 किमी दूर छत्री रोड पर स्थित सिद्ध स्थान का अपना ही महत्व है। प्राचीन बरगद के पेड़ के बीच में भगवान शिव का मंदिर है। जहां आने वाले भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। इस सिद्ध स्थल पर मंदिर के पास ही एक प्राचीन नाला है, जिसमें भीषण गर्मी के समय में भी पानी रहता है।



मंदिर के महंत ने बताया कि द्वापर युग में पांचों पांडवों ने यहां पर अज्ञातवास का समय गुजारा था। जिस बरगद के पेड़ के बीच में शिवजी का मंदिर बना है, उसमें पांडवों ने अपने अस्त्र-शस्त्र छुपाए थे। पांडवों की उपस्थिति के और भी कई चिन्ह यहां पर मंदिर के आसपास मिलते हैं।

अर्जुन ने मारा था वाण, तब बने बावन कुंड
महंत ने बताया कि अज्ञातवास के दौरान अर्जुन गायों को चराया करते थे। एक बार जब गायों को प्यास लगी तो अर्जुन ने पेड़ के बीच में छुपाए गए अपने शस्त्र निकाले और वाण मारा तो 32 कुंड बन गए, जिनमें से जल की धारा फूट पड़ी। तभी से यह वावन कुंड यहां पर बने हुए हैं।




इसलिए शिवपुरी को कहा जाता है शिव की पुरी
ग्वालियर संभाग मुख्यालय से 110 किलोमीटर की दूरी पर स्थित शिवपुरी में भगवान शिव के प्राचीनतम मंदिर हैं। इस नगर को शैव सम्प्रदाय के अनुयायियों ने अपना निवास स्थान बनाया था और यहां पर उन्होंने भगवान शिव की अराधना करने के लिए कई शिवमंदिरों का निर्माण करवाया। इसके बाद इस प्राचीनतम नगर का नाम शिवपुरी पड़ गया।



इस साल सावन में बन रहा है ये महाशुभ संयोग
इस वर्ष का सावन अपने साथ में महाशुभ संयोग लेकर आया है। ऐसा संयोग 50 सालों के बाद पड़ रहा है। इस बार सावन माह में 5 सोमवार पड़ेंगे। इसे विशिष्ठ संयोग माना जा रहा है। खास बात यह है कि इस साल राखी पर चंद्र ग्रहण रहेगा। यह भी एक दुर्लभ घटना है। सर्वार्थ सिद्धि योग से 10 जुलाई को सावन का शुभारंभ हो चुका है। वहीं इसका समापन भी सोमवार को सर्वार्थ सिद्धि योग और चंद्र ग्रहण के साथ होगा। 24 जुलाई को पुष्य नक्षत्र होगा। सावन में इस तरह के संयोग 50 साल बाद बने हैं।
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