
तहसीलदार के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने के आदेश
ग्वालियर। उच्च न्यायालय ने अतिरिक्त तहसीलदार मुरार नरेशचंद गुप्ता के खिलाफ न्यायालय की अवमानना के साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13-1 डी के तहत मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही न्यायालय ने तहसीलदार को जिस प्रॉपर्टी के संबंध में आदेश दिए गए थे उसका पालन कर पांच जनवरी को शपथ पत्र प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।
न्यायमूर्ति गुरपाल सिंह अहलुवालिया ने आदेश में कहा कि इस मामले में यह स्पष्ट है कि अतिरिक्त तहसीलदार मुरार नरेशचंद गुप्ता ने जानबूझकर आदेश का पालन नहीं किया। उन्होंने ऐसा अवैध रूप से लाभ प्राप्त करने व इसके जरिए प्रेमचंद सचदेवा को अनुचित लाभ पहुंचा रहे थे। न्यायालय ने कहा कि अनुचित लाभ के लिए किस प्रकार कार्य किया जाता है यह प्रकरण इसका एक उदाहरण है। इस कारण तहसीलदार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने के आदेश न्यायालय ने दिए ।
प्रकरण की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने प्रतियाचिकाकर्ता अतिरिक्त तहसीलदार नरेश चन्द्र गुप्ता से कहा गया कि वे न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश का आपरेटिव पार्ट पढक़र सुनाएं। इस पर वे आदेश को बड़ी मुश्किल से पढ़ पाए। हालांकि उन्होंने यह खुले तौर पर स्वीकार किया कि वे अंग्रेजी में आदेश होने के कारण उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश का अर्थ नहीं समझ पाए। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा नरेशचन्द गुप्ता द्वारा जो स्वीकारोक्ति की गई है वह सही दिखाई नहीं दे रही है क्योंकि जब बैंक द्वारा इस मामले में नोटिस जारी किया गया था तब बैंक ने उच्च न्यायालय के आदेश का अनुवाद कर ही कार्रवाई की थी। बैंक के लोन का भुगतान नहीं होने के मामले में न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के अनुसार तहसीलदार गुप्ता को नीलामी की कार्रवाई पूरी करनी थी। इस प्रकार तहसीलदार के पास न केवल हाईकोर्ट का आदेश था बल्कि बैंक का जवाब भी था जो कि हिंदी में था। इस प्रकार वे कोर्ट के आदेश से वाकिफ थे। इसके बावजूद उन्होंने कानून का पालन करने के बजाय अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि शुरुआत में एेसा लग रहा था कि यह मामला गलत समझ का है लेकिन कार्यवाही के दौरान तहसीलदार गुप्ता ने साफ तौर पर प्रेमचंद सचदेवा को लाभ पहुंचाने के लिए नीलामी की कार्रवाई नहीं की। प्रेमचंद सचदेवा के आधिपत्य में ही प्रॉपर्टी थी जोकि असफल नीलामीकर्ता है। उसकी याचिका को अदालत द्वारा वर्ष 2011 में खारिज किया जा चुका है। यह जानते हुए भी तहसीलदार प्रेचंद सचदेवा का मालिकाना हक बना रहे वे इस संपत्ति की नीलामी टालते रहे। इस प्रकार उन्होंने लगातार नियमों का पालन नहीं किया। न्यायालय ने कहा कि तहसीलदार संबंधित प्रापर्टी का आधिपत्य लेकर न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए शपथ पत्र पर अपनी पालन रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
Published on:
06 Jan 2019 01:00 am
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