
अवमानना में आरोप तय कर दंड पर सुनने आयुष विभाग के प्रमुख सचिव व आयुक्त 15 को तलब
दरअसल डॉ अमित केवट की 2015 में पीएससी के माध्यम से आयुष विभाग में भर्ती हुई थी। डॉ केवट को यह नौकरी आदिवासी के जाति प्रमाण पत्र पर मिली। विभाग ने 2019 में यह कहते हुए नौकरी से हटा दिया कि जाति प्रमाण पत्र सही नहीं है। मांझी समाज का प्रमाण पत्र फर्जी है। नौकरी से हटाए जाने के आदेश के खिलाफ डा केवट ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। अधिवक्ता डीपी सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट में रिकॉर्ड पेश किया। यह विभाग से ही जाति प्रमाण पत्र जारी हुआ था। इस आधार पर कोर्ट ने आदेश दिया कि तत्काल प्रभाव से डा केवट को विभाग में जॉइन कराया जाए। शासन चाहे तो हाई पावर कमेटी से जाति प्रमाण पत्र की जांच करा सकते हैं। इस आदेश के खिलाफ शासन ने युगल पीठ में रिट अपील दायर की, लेकिन विभाग को राहत नहीं मिल सकी। डा केवट ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की। कोर्ट ने इस मामले में जवाब मांगा था। न जवाब दिया जा रहा था और न अधिकारी उपस्थित हो रहे थे। 9 फरवरी को आयुक्त सोनाली पोंक्षे वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़ी और उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर दी है। प्रमुख सचिव को हाजिरी माफी दी जाए। कोर्ट ने आदेश का पालन नहीं होने पर नाराजगी जताई। कल्पना श्रीवास्तव व सोनाली पोंक्षे को अवमानना के दंड पर सुनने के लिए तलब किया है।
Published on:
13 Feb 2024 10:06 pm
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