
गुरु के प्रति श्रद्धा और विश्वास से होते हैं जीवन के सारे संशय दूर
ग्वालियर. हर व्यक्ति के जीवन में गुरु के प्रति श्रद्धा होनी चाहिए एवं इष्ट के प्रति विश्वास भी होना चाहिए। यदि गुरु के प्रति श्रद्धा नहीं होगी तो साधक का जीवन व्यर्थ है, उसका कोई उपयोग नहीं है। इसलिए जिस पर भी तुम्हारी श्रद्धा हो उसके पास जाना, जिस पर तुम्हारी श्रद्धा न हो उससे दूर ही रहना। यदि ऐसा नहीं करोगे तो जीवन की कोई भी समस्या का समाधान नहीं होगा। यह विचार बड़ोदा गुजरात से आए अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के संत रामप्रसाद ने लक्ष्मीगंज रामद्वारा में गुरुवार से शुरू हुए 10 दिवसीय सत्संग समारोह में रविवार को व्यक्त किये।
सत्संग के तीसरे दिन संत ने कहा कि श्रद्धा होगी तो तुम दूसरे किनारे पहुंच जाओगे क्योंकि विश्वास होने से हमारे जीवन के सारे संशय भ्रम दूर हो जाएंगे और जीवन के अंदर जीवन पवित्र होकर सारे शौक दूर होकर परमात्मा का रंग लग जाएगा। गुर साक्षात ब्रह्म है, उसको पहचानने वाली हमारी आंख होना चाहिए और जिस दिन गुरु को पहचान लिया उस दिन हमारे जीवन का बेड़ा पार हो जाएगा। सद्गुरु की सभी साधकों पर कृपा एक जैसी बरसती है परंतु हर एक साधक के अनुभव अपनी-अपनी श्रद्धा के अनुसार होते हैं। जिसकी जैसी श्रद्धा होती है वैसा ही उस साधक का अनुभव होता है। अपने जीवन में श्रद्धा को बढ़ाएंगे जो जीवन में नई-नई अनुभूतियां होंगी। सत्संग के बाद सद्गुरु परिवार सेवा समिति एवं रामद्वारा ट्रस्ट की ओर से व्यासपीठ की आरती कर प्रसाद वितरण किया गया।
Published on:
24 Nov 2019 11:24 pm
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