ऐसे चला घटनाक्रम
-15 सिंतबर को लैंड रिकॉर्ड के बाबू संजय भागवानी के घर चोरी हुई।
-18 सितंबर को चोरी का खुलासा होने पर पुलिस को पता चला।
-27 सितंबर को पड़ोसी भागीरथ ने 48 लाख रुपए पुलिस को थमाए।
-लैंड रिकॉर्ड के बाबू के घर मिली रकम के मामले में उस पर विभागीय जांच श्ुारू हुई। इसी दौरान प्रमुख सचिव राजस्व, कमिश्नर लैंड रिकॉर्ड और टीआई पड़ाव का तबादला हुआ।
-नाटकीय अंदाज में संजय के साले ने रकम अपनी बताते हुए कहा, रकम जमीन के सौदे के लिए रखी थी।
खड़े हुए ये सवाल
-भागीरथ छह दिन अस्पताल में भर्ती रहा, ग्वालियर पहुंचने के खुलासे के तीसरे दिन उसकी हालत एकदम कैसे बिगड़ी।
-भागीरथ की मौत के बाद चोरी की शेष रकम एक करोड़ कहां है, पुलिस अब मुश्किल में है।
-वांटेड भागीरथ सिर्फ लकवे और सदमे से पीडि़त था। चिकित्सकों का कहना था, उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं है, लेकिन उसकी जान को खतरा नहीं है।
-चोरी में नाम आने के बाद उसने पुलिस को चकमा देने की कोशिश क्यों की।
-चोरी की प्लाङ्क्षनग में कौन-कौन लोग शामिल थे।
मददगारों पर पुलिस की नजर मला
भागीरथ की मौत के बाद अब पुलिस का पूरा ध्यान मददगारों पर है। पुलिस को पता चला है कि मददगार ने ही उसे आगरा में भर्ती कराया था और कुछ दिन बाद उसे सिम्स में भी भर्ती कराया। जाहिर है मदद्गारों और बिचौलियों को भागीरथ की मौजूदगी पता थी। पुलिस को शक है चोरी की रकम का बड़ा भाग बिचौलियों पर है। पुलिस अब मददगारों पर नजर रखेगी और शेष रकम का पता लगाएगी।