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  हथकड़ी लगे हाथों से दी पिता को मुखाग्नि, जानिए कैसे बने इस युवक के ये हालात?

चारों तरफ पुलिस की पहरा, हाथों में हथकड़ी, बंदी युवक शमशान घाट में अपने पिता की चिता को आग देता है। आंखों से आंसू बंद होने का नाम नहीं ले रहे, लोग सांत्वना देते हैं।

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Gaurav Sen

Oct 30, 2016

bhagirath prajapati

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ग्वालियर। चारों तरफ पुलिस की पहरा, हाथों में हथकड़ी, बंदी युवक शमशान घाट में अपने पिता की चिता को आग देता है। आंखों से आंसू बंद होने का नाम नहीं ले रहे, लोग सांत्वना देते हैं। मुखाग्नि देने वाला युवक है रवि प्रजापति जिसके पिता भागीरथ प्रजापति की शनिवार सुबह अस्पताल में मौत हो गई है। भागीरथ 2.5 करोड़ की चोरी में संदेही था। रवि भी वही 2.5 करोड़ के चक्कर में जेल में है। जो पैरोल पर पिता के अंतिम संस्कार में आया था।


पैसा आदमी को बर्बाद कर देता है
ऐसा सबने सुना है लेकिन ग्वालियर का प्रजापति परिवार इस बाद को महसूस कर रहा है। 2.5 करोड़ की चोरी के आरोप में संदिग्ध मजदूर नेता भागीरथ प्रजापति की फेंफड़ों में संक्रमण के कारण शनिवार सुबह मृत्यु हो गई। भागीरथ की पुत्र रवि प्रजापति जो कि इसी 2.5 करोड़ की चोरी की जांच के चलते ग्वालियर जेल में बंद था। पैरोल पर पिता की चिता को आग देने के लिए आया था। रवि पुलिस वालों की देखरेख में लाया गया था। रवि के हाथों में हथकड़ी लगी हुई थी, हथकड़ी लगें हाथों से ही रवि ने पिता भागीरथ की चिता को आग दी। मुखाग्नि देने के तुरंत बाद ही रवि को पुलिस ले गई।


पिता की मौत पर पेरोल पर छूटा
इसके बाद शनिवार की सुबह भागीरथ की रहस्यमय ढंग से मौत हो गई। मौत के बाद पुलिस उसके बेटे रवि को जेल से पेरोल पर रिहा कराकर लाई। रवि हथकड़ी पहनकर ही घर आया और बाद में पिता भागीरथ का अंतिम संस्कार करने श्मशान घाट पहुंचा। अंतिम संस्कार के समय भी पुलिस ने रवि के हाथों की हथकड़ी नहीं खोली। हथकड़ी लगे हाथों से ही रवि ने बिलखते हुए पिता का अंतिम संस्कार किया। अब फिर से रवि को जेल भेज जा रहा है। फिलहाल इस मामले की पुलिस जांच कर रही है।


यह था मामला
लैंड रिकॉर्ड के बाबू संजय भागवानी के सूने घर से भतीजे नितिन और पड़ोसी भागीरथ प्रजापति के बेटे रवि ने ढाई करोड़ रुपए चुराए थे, लेकिन चोरी का राज तीन दिन बाद खुला। संजय ने सिर्फ चार लाख रुपए ही चोरी होना बताए और शक जताया कि चोरी में पड़ोसी शामिल हो सकता है। कुछ दिन बाद नाटकीय अंदाज में भागीरथ ने 48 लाख रुपए पुलिस को थमाकर अपने मददगारों के जरिए ईमानदारी का दंभ भरा, लेकिन जब नितिन ने बताया, चाचा संजय के घर से ढाई करोड़ रुपए चोरी हुए हैं तो पुलिस के कान खड़े हो गए। इसके बाद नितिन, रवि और वैभव को पकड़ा, लेकिन भागीरथ फरार हो गया था।

ऐसे चला घटनाक्रम
-15 सिंतबर को लैंड रिकॉर्ड के बाबू संजय भागवानी के घर चोरी हुई।
-18 सितंबर को चोरी का खुलासा होने पर पुलिस को पता चला।
-27 सितंबर को पड़ोसी भागीरथ ने 48 लाख रुपए पुलिस को थमाए।


-लैंड रिकॉर्ड के बाबू के घर मिली रकम के मामले में उस पर विभागीय जांच श्ुारू हुई। इसी दौरान प्रमुख सचिव राजस्व, कमिश्नर लैंड रिकॉर्ड और टीआई पड़ाव का तबादला हुआ।
-नाटकीय अंदाज में संजय के साले ने रकम अपनी बताते हुए कहा, रकम जमीन के सौदे के लिए रखी थी।


खड़े हुए ये सवाल
-भागीरथ छह दिन अस्पताल में भर्ती रहा, ग्वालियर पहुंचने के खुलासे के तीसरे दिन उसकी हालत एकदम कैसे बिगड़ी।
-भागीरथ की मौत के बाद चोरी की शेष रकम एक करोड़ कहां है, पुलिस अब मुश्किल में है।
-वांटेड भागीरथ सिर्फ लकवे और सदमे से पीडि़त था। चिकित्सकों का कहना था, उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं है, लेकिन उसकी जान को खतरा नहीं है।
bhagirath prajapati
-चोरी में नाम आने के बाद उसने पुलिस को चकमा देने की कोशिश क्यों की।
-चोरी की प्लाङ्क्षनग में कौन-कौन लोग शामिल थे।

मददगारों पर पुलिस की नजर मला
भागीरथ की मौत के बाद अब पुलिस का पूरा ध्यान मददगारों पर है। पुलिस को पता चला है कि मददगार ने ही उसे आगरा में भर्ती कराया था और कुछ दिन बाद उसे सिम्स में भी भर्ती कराया। जाहिर है मदद्गारों और बिचौलियों को भागीरथ की मौजूदगी पता थी। पुलिस को शक है चोरी की रकम का बड़ा भाग बिचौलियों पर है। पुलिस अब मददगारों पर नजर रखेगी और शेष रकम का पता लगाएगी।

गिरफ्तारी के लिए प्रेशर
सिम्स अस्पताल में भागीरथ के भर्ती होने पर बुधवार को पुलिस के पास उसकी गिरफ्तारी को लेकर कई फोन आए। यह पहली बार था, जब किसी चोर को पकडऩे के लिए उसके मददगार ही गिरफ्तारी के लिए पुलिस पर प्रेशर बना रहे हों।

परिजन के इंकार करने पर पीएम नहीं कराया गया है। इंवेस्टीगेशन में अभी कई बिंदु हैं। बाकी रकम बरामदगी के लिए कुछ लोगों से पूछताछ की जाएगी।
हरिनारायणाचारी मिश्र, एसपी ग्वालियर

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