अचलेश्वर से फूलबाग तक मुख्यमंत्री करेंगे रोड शो
ग्वालियर। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की रविवार को जनदर्शन यात्रा के लिए अचलेश्वर मंदिर से फूलबाग तक ढाई किमी के एरिया की सडक़, चेंबर डिवाइडर व लाइटों को तीन दिन में चकाचक कर दिया गया। जबकि आसपास के एरिया की सडक़ों, डिवाइडरों पर गंदगी व बंद लाइटों से अंधेरा पड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री का रथ चेंबर या गड्ढे में ऊंचा-नीचा न हो इसके लिए चेंबर के ऊपर भी पेचवर्क कर उसे पैक कर दिया गया है। सीएम की जनदर्शन यात्रा जहां से गुजरेगी उस क्षेत्र की सडक़े, डिवाइडर की रंगाई पुताई, स्ट्रीट-एलईडी लाइटें, पेड़-पौधे की छटाई व उस एरिया में लगे सभी सीसीटीवी कैमरे को चालू कर दिया है।
जबकि उस क्षेत्र की रानीपुर, रोशनी घर, राजीवा प्लाजा की पार्किंग वाली, दाल बाजार क्षेत्र, अस्पताल रोड, नदी गेट के पास वाली गली-मोहल्ले व प्रमुख सडक़े सहित अन्य सडक़े बीते एक साल व छह महीने से जर्जर व खस्ताहाल स्थिति हंै। हालांकि निगम का दावा है कि 15 सितंबर से सडक़ों का कार्य शुरू कराया जाएगा। जबकि बंद स्ट्रीट व एलईडी लाइटों को चालू करने का काम जारी है।
तीन दिन में यह हुए कार्य............
-डिवाइडर पर रंगाई-पुताई के लिए एक दो नहीं बल्कि 63 कर्मचारियों को लगाकर जयेंद्रगंज से सभा स्थल के सभी डिवाइडरों व पॉइंटरों की रंगाई पुताई की गई है।
-सडक़े चकाचक- जनदर्शन यात्रा की दूरी करीब ढाई किमी की है और उस रास्ते पर पडऩे वाली सभी सडक़ों पर एक बार नहीं बल्कि दो-तीन बार पेचवर्क किया गया है।
-चेंबर भी पैक-जयेंद्रगंज से नदी गेट व गुरुदरे तक हमेशा खुले पड़े रहने वाले चेंबर को सही निगम का अमला जुटा रहा। अमले ने अचलेश्वर से फूलबाग तक सभी 23 चेंबरों को पैक कर दिया है। वहीं रथ ऊंचा नीचा न हो इसके लिए कुछ चेंबर के ऊपर भी पेचवर्क किया।
-पेड़-पौधे की कटाई छटाई-जयेंद्रगंज पोस्ट ऑफिस से सभा स्थल तक डिवाइडर पर लगे पौधे व जलविहार वाले रास्ते पर लगे छोटे-बड़े पेड़-पौधे की कटाई छटाई की गई है। इससे वह रास्ते में अवरोध पैदा न करें।
ये सडक़े अभी भी हंै जर्जर-खस्ताहाल
-रोशनी घर मार्ग-यात्रा के रूट से सटी यह सडक़ तीन महीने से ख्ुादी पड़ी हैं। अभी यहां सफेद गिट्ïटी डाल दी है। यहां कुछ लाइटें भी बंद पड़ी है।
-जयेंद्रगंज पार्किंग-रूट के बीच में से निकली जयेंद्रगंज पार्किंग वाली सडक़ पर जगह-जगह गड्ढे पड़े हुए हैं। हालांकि यहां सभी लाइटों को चालू कर दिया है।
-नदी गेट-नदी गेट के पुल से निकलकर छप्पर पुल व शिंदे की छावनी की ओर जाने वाली सडक़ पर भी जगह-जगह गड्ढे व यहां लाइटें भी बंद पड़ी हुई है।
-खटीक मोहल्ला-जयेंद्रगंज की खटीक मोहल्ला में बनी सडक़ पर गडढे में बारिश का पानी जमा हो गया है और गली में गंदगी भी जगह-जगह पड़ी हुई है।
निगम के दावा व हकीकत में अंतर
दावा-नगर निगम द्वारा बीते एक साल में पेचवर्क के नाम पर 5 करोड़ व सडक़ों के मरम्मत के नाम पर 25 सहित कुल 30 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं।
हकीकत-वर्तमान में शहर की सिर्फ चार सडक़े मेला ग्राउंड, सिटी सेंटर, कलेक्ट्रेट, आकाशवाणी रोड की सडक़ को छोडकऱ शहर की लगभग हर सडक़ की जर्जर व खस्ताहाल स्थिति है।
इन उदाहरण से समझिए आम व खास सडक़
उदाहरण-1
खास सडक़ : सिटी सेंटर क्षेत्र की सडक़ हमेशा चकाचक रहती है, क्योकि यहां से न्यायाधीश, कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों को हर दिन आना-जाना रहता है।
आम सडक़ : सिटी सेंटर के पीछे बनी पटेल नगर क्षेत्र की सडक़ बीते चार साल से जर्जर व कंडम स्थिति में पड़ी हुई हैं। इसकी ओर कोई ध्यान नहीं है।
उदाहरण-2
खास सडक़ : पड़ाव पुल से मुरार क्षेत्र की ओर जाने वाली सडक़ पर सभागीय आयुक्त, कलेक्टर, आयुक्त व एसपी सहित अन्य अधिकारियों के बंगला होने के चलते यह सडक़ हमेशा चकाचक रहती है।
आम सडक़ : नई सडक़ के रोड पर सडक़ कम गड्ढे अधिक होने से यहां हर दिन कोई न कोई गिरकर चोटिल होता है। यहां लगभग हर महीने पेचवर्क का कार्य होता है। यह सडक़ 8 साल से खराब है।
65000 में 22 हजार लाइट अभी भी बंद
मुख्यमंत्री के रूट पर पडऩे वाली करीब 300 लाइटों को तीन दिन में भले ही चालू कर दिया गया है। जबकि निगम सीमा क्षेत्र में 65000 लाइटों में से करीब 22 हजार अभी भी बंद पड़ी हुई है।
15 डंफर जीरा व 10 डंफर डामर डाला
अचलेश्वर से इंद्रगंज तक डामर की गाड़ी 6 और जीरे के 7 डंफर, इंद्रगंज से फूलबाग तक सडक़ पर 4 डंफर डामर और सभास्थल पर 8 डंफर जीरा डाला गया।
बारिश में नहीं बनाई जाए डामर की सडक़
"शहर की अधिकांश सडक़े जर्जर व खस्ताहाल स्थिति में है। इससे आए दिन घटनाएं होती व प्रदूषण भी बढ़ता है। ऐसी सडक़ों को बारिश से पूर्व हर हाल में बना लेना चाहिए और उनमें इमल्शन का छिडकाव कर डामर बेहतर क्वालिटी का ही प्रयोग करना चाहिए। क्योकि जितनी अधिक वीजी होगी डामर उतना हार्ड होगा और अधिक टेंपरेचर को सहन कर सकेगा। अभी जो पेचवर्क किया जा रहा है वह भी जल्द ही खराब हो जाएगा। बारिश में कभी भी डामर वाली सडक़ नहीं बनाना चाहिए और सबसे अच्छा तरीका है कि सीमेंट कांक्रीट की सडक़े बनाई जानी चाहिए। हालांकि यह शुरुआत में महंगी है पर अधिक टिकाऊ हैं।"
नरेंद्र सिंह, इंजीनियर पीडब्ल्यूडी
"इंदौर-भोपाल से भी अधिक विकास कार्य के टेंडर ग्वालियर से लगाए गए हैं। सडक़ों के टेंडर लगा दिए और कुछ ओपन भी हो गए है। अभी बारिश के चलते कार्य बंद था, 15 सितंबर से सडक़ निर्माण का कार्य शुरू कराया जाएगा। अधिकतर लाइटों को चालू किया जा चुका है।"
हर्ष सिंह आयुक्त नगर निगम