
ग्वालियर। धूम्रपान और प्रदूषण के कारण सीओपीडी (क्रॉनिक आव्स्टे्रक्टिव पल्मनोरी डिसीज) पेशेंट बढ़े हैं। अवेयरनेस न होने के कारण दुनिया में सीओपीडी से मौत का रेश्यो अब तीसरे नंबर पर आ चुका है, जबकि पहले और दूसरे नंबर पर कैंसर और हार्ट अटैक हैं। वहीं पिछले पांच साल में सीओपीडी 30 परसेंट केस बढ़े हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि प्रदूषित वातावरण के एक्सपोजर से सांस नली सिकुड़ने लगती है। इससे लंग्स एवं हार्ट में दबाव पड़ता है। समय पर इलाज ही इसका उपाय है। यदि ऐसा नहीं होता है मरीज को जान का खतरा भी हो सकता है।
ये भी जानें
- इन्हेलेशन मेडिसिन ही इसका उचित इलाज है। इसका उपयोग डॉक्टर द्वारा बताई गई मात्रा के अनुसार करें।
- नियमित इलाज से खांसी कम होगी और आप ज्यादा आसानी से सांस ले सकेंगे। ज्यादा अच्छी नींद ले सकेंगे।
ये हैं लक्षण
- होंठ व उंगलियों के नाखून नीले पड़ना। चलने तथा बात करने में मुश्किल होना।
- दिल की धड़कन या नब्ज तेज चलना। नियमित लेने वाली दवाओं का असर कम होना।
फेफड़े के अंदर की नलियां सिकुड़ने से हवा बाहर नहीं निकल पाती
अस्थमा रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुपम ठाकुर ने बताया कि सीओपीडी के कारण फेफड़े के अंदर की नलियां सिकुड़ जाती हैं, जिसकी वजह से हवा ठीक तरह से फेफड़ों से बाहर नहीं निकल पाती। पेशेंट इस रोग से कितने प्रभावित हैं, इसका पता स्पायरोमीटरी मशीन से लगाया जा सकता है। सीओपीडी माइल्ड, मॉडरेट एवं सीवियर होती है।
ऑक्सीजन की मात्रा भी होने लगती है कम
चेस्ट फिजीशियन डॉ. उज्जवल शर्मा ने बताया कि सीओपीडी पेशेंट में लंग्स में दबाव के कारण रक्त का संचार कम हो जाता है। ऑक्सीजन की मात्रा भी कम होने लगती है। पेशेंट ने यदि सही समय पर ट्रीटमेंट नहीं लिया तो मरीज की मौत भी हो सकती है। ट्रीटमेंट के साथ पौष्टिक आहार लें। धुएं तथा गंध से बचें। अपने घर और वातावरण की साफ सफाई रखें।
Published on:
17 Nov 2022 03:02 pm
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