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स्ट्रीट लाइट हैं मगर रोशनी नहीं

निगम ने लाखों रुपए खर्च कर लाइट लगाई भीं लेकिन इनका कोई फायदा ही नहीं हुआ। दरअसल यह लाइट इतना अधिक ऊंचाई पर हैं कि रोशनी नीचे तक नहीं पहुंचती है।

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स्ट्रीट लाइट हैं मगर रोशनी नहीं

ग्वालियर. शहर की सडक़ों पर नगर निगम द्वारा स्ट्रीट लाइट लगाई जाती हैं। कई जगहों पर तो स्ट्रीट लगी भी हैं इसके बावजूद सडक़ अंधेरे में डूबी रहती है। दरअसल यह स्ट्रीट इतने कम वाट की लगाई हैं कि जिससे सडक़ पर रोशनी ही नहीं होती है। कुछ यही हाल है गोला का मंदिर से डीडी नगर सडक़ का। यहां भी हाल ही में नगर निगम द्वारा लाखों रुपए से स्ट्रीट लाइट तो लगा दीं लेकिन इनकी रोशनी इतना कम है कि कुछ दिखाई ही नहीं देता है। जिसके कारण अक्सर हादसे हो जाते हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे दुरुस्त कराने की कोशिश ही नहीं की। आलम यह है कि स्ट्रीट लाइट के बावजूद लोगों को कुछ भी दिखाई नहीं देता है।

गोला का मंदिर चौराहे से एयरपोर्ट रोड तक डिवाइडर बनाया गया है। इनके बीच में स्ट्रीट लाइट के लिए काफी समय से विद्युत पोल लगा दिए गए थे। इन सभी पर नगर निगम को स्ट्रीट लाइट लगाना थीं। निगम ने लाखों रुपए खर्च कर लाइट लगाई भीं लेकिन इनका कोई फायदा ही नहीं हुआ। दरअसल यह लाइट इतना अधिक ऊंचाई पर हैं कि रोशनी नीचे तक नहीं पहुंचती है। इस मार्ग पर कई जगह कट बने हुए हैं जब इनमें से कोई वाहन निकलता है तो सामने से आ रहे वाहन को यह दिखाई नहीं देते। जिसके चलते कई बार यहां हादसे भी हो चुके हैं। इसको लेकर कई बार राहगीरों ने आपत्ति भी जताई इसके बावजूद नगर निगम अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है।

150 वॉट की लगाई लाइट

नगर निगम द्वारा स्ट्रीट लाइट लगाने में लापरवाही बरती गई है। मुख्य मार्ग होने के बावजूद महज 150 वाट की लाइटों को उपयोग किया गया है। दूसरा इन्हें नीचा लगाने के बजाय काफी ऊंचाई पर लगा दिया गया है। आलम यह है कि कॉलोनियों में लगाई जाने वाली लाइट भी इनसे अधिक वाट की होती हैं। कम वॉट के कारण नीचे तक रोशनी ही नहीं पहुंचती है। आलम यह है कि पोल पर स्ट्रीट लाइट की जगह घर में लगी सीएफएल की तरह दिखाई देती हैं।