
आदिवासियों के लिए बना था रैन बसेरा, अनदेखी से गेट तक उखाड़ ले गए लोग
श्योपुर। सुदूर गांवों से श्योपुर आने वाले आदिवासियों को रात्रि विश्राम के लिए बनाया गया रैन बसेरा विभागीय अनदेखी की भैंट चढ़ गया है। रैन बसेरा के दो हॉल की खिड़कियों को लोग उखाड़ ले गए हैं। बाउंड्री का मेन गेट भी चोरी हो गया अब सिर्फ निशान बचे हैं। अंदर कमरों में शराब की बोतलें और कचरा फैला है। प्रसाधन कक्ष भी अब उपयोग के लायक नहीं बचे। रखरखाव के अभाव में पूरा भवन खराब होता जा रहा है। भवन के रखरखाव को लेकर आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त का रवैया बेहद गैर जिम्मेदाराना दिखा। बात करने पर उन्होंने कहा कि बजट आए तो ही हम इसकी मरम्मत का प्रयास करेंगे। अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए उन्होंने यह भी कहा कि हमने तो भवन को नगर पालिका को देने के लिए कह दिया था, लेकिन नपा ने ध्यान नहीं दिया।
दरअसल, जिला मुख्यालय से कराहल क्षेत्र के सुदूर अंचल के 117 गांवों से सामान्य काम काज के अलावा दैनिक खरीदारी के लिए भी आदिवासी समुदाय के लोग श्योपुर आते हैं। वापसी में देर होने पर ये आदिवासी वन्य प्राणियों के खतरे से जूझते हुए अपने गांवोंं तक पहुंचते थे। अक्सर भालू और तेंदुओं से सामना होता रहता है। इसको ध्यान में रखकर आदिम जाति कल्याण विभाग ने शहर आने वाले आदिवासियों को रात बिताने की सुविधा देने के लिए रैन बसेरा बनाया था। बनने के बाद से ही इसका कभी उपयोग नहीं किया गया। भवन पर लगी शिलापट्टिका के अक्षर भी मिट चुके हैं। विभागीय अधिकारी बेशकीमती जगह पर बने इस भवन को न तो उपयोग में ले रहे हैं और न ही किसी अन्य विभाग को उपयोग के लिए दे रहे हैं।
फिटिंग उखाड़ी, सामान गायब
करीब 1500 वर्गफीट में बने रैन बसेरा में देा बड़े हॉल हैं। दोनों हॉल के बगल में लैटबाथ हैं। इसके अलावा कार्यालय और स्टोर के लिए एक-एक कक्ष बनाया गया है। हॉल और कमरों में लगे बिजली के बोर्ड, तार सहित अन्य सामान लोग उखाड़ ले गए हैं। वॉशरूम में लगी टोंटियां गायब हैं और पॉट पर लगे टॉयल्स भी लोगों ने उखाड़ दिए हैं। आसपास बगीचा लगाने के लिए लगभग 4 हजार वर्गफीट जगह छोड़ी गई है। इसमें अब एक भी पेड़ नहीं बचा है। पानी के लिए लगाया हैंडपंप ही सही सलामत बचा है। इसका सदुपयोग नहीं हो रहा है।
नशेडिय़ों की मन पसंद जगह
भवन के दोनों हॉल नशेडिय़ों का अड्डा बन गए हैं। जजेज कॉलोनी के पीछे मौजूद इस भवन की निगरानी कोई नहीं करता। ऐसे में यह जगह अब शराबी और अनैतिक काम करने वालों की मनपसंद जगह बन गई है। नशाखोर भवन के नजदीक ही लगे हैंडपंप से पानी लेकर शराब का उपयोग करते हैं।
वर्सन
-रैन बसेरा हमारे विभाग का ही है, अब इसका उपयोग नहीं हो रहा है। नगर पालिका ने इसे ले सकती थी, हमारे पास तो अभी मरम्मत आदि के लिए बजट नहीं है। बजट आए तो हम इसकी रिपेयरिंग का प्रयास करें।
-एमपी पिपरिया, प्रभारी सहायक आयुक्त-आदिम जाति कल्याण विभाग
Published on:
08 Jan 2023 12:02 am

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