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सालों बीते नहीं सुधरी पोस्टमार्टम हाउस की हालत?

पोस्टमार्टम हाउस पर बैठने के लिए जो सीमेंट की कुंर्सियां लगाई गई थीं, उनमें अधिकांश टूट चुकी हैं। लोग जब शव लेकर पहुंचते हैं तो उन्हें जमीन पर बैठना पड़ता है। अगर बारिश हो जाए तो लोगों को भीगना पड़ता है, क्योकि वहां ऐसा कोई ठिकाना नहीं जहां खड़े होकर बचा जा सके।

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सालों बीते नहीं सुधरी पोस्टमार्टम हाउस की हालत?

सालों बीते नहीं सुधरी पोस्टमार्टम हाउस की हालत?

ग्वालियर. हादसे में मरने वाले लोगों के शवों का पोस्टमार्टम कराने आने गमगीन लोग इस व्यवस्था को देखते या सहते हैं तो कितना बुरा लगता है? लेकिन उनकी मजबूरी कहें या कुछ और। क्योंकि ये लोग उस समय व्यवस्थाओं के बारे में कुछ बोलने की स्थिति में नहीं होते हैं। क्या प्रशासन को इन गमगीन लोगों की सुविधा के लिए पोस्टमार्टम हाउस की या उसके आसपास बैठने या साफ पीने के पानी जैसी मूलतभूत सुविधाओं की व्यवस्था नहीं करना चाहिए। शहर में ऐसा ही एक पोस्टमार्टम हाउस कम्पू स्थित है। यहां सालों बीत गए व्यवस्थाएं जस की तस बनी हुई हंै। न तो वहां बैठने की समुचित व्यवस्था है और न ही बारिश से बचने के लिए छत। कुल मिलाकर रोजाना लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। संबंधित विभाग को सारी जानकारी होने के बाद भी व्यवस्थाएं सुधर नहीं रही हैं। पोस्टमार्टम हाउस जहां रोजाना शव पीएम के लिए पहुंचते हैं। सिर्फ ग्वालियर के ही नहीं आस-पास के जिलों या प्रदेश की जो घटना या वारदात में घायल होकर अस्पताल आते हैं और उनकी मृत्यू हो जाती है। उनका यहीं पोस्टमार्टम होता है फिर भी व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रहीं।
पोस्टमार्टम हाउस पर बैठने के लिए जो सीमेंट की कुंर्सियां लगाई गई थीं, उनमें अधिकांश टूट चुकी हैं। लोग जब शव लेकर पहुंचते हैं तो उन्हें जमीन पर बैठना पड़ता है। अगर बारिश हो जाए तो लोगों को भीगना पड़ता है, क्योकि वहां ऐसा कोई ठिकाना नहीं जहां खड़े होकर बचा जा सके। कुछ साल पहले टीन शेड लगाई गई थीं, जिसमें एक तो टूटकर अलग हो चुकी है। दूसरी भी कई जगह से टूट चुकी है, इस कारण पानी टपकता रहता है। कई सामाजिक संस्थाएं इस शहर में काम कर रही हैं, लेकिन कोई भी इस तरफ ध्यान नहीं देता। अगर टीन शेड या अन्य कोई इंतजाम कर दिया जाए तो शव लेकर आने वाले लोग वहां बैठकर बारिश से बच सकते हैं।

भींगते हुए कराना पड़ा पीएम

दो दिन पहले कि बात है हादसे में एक युवक की मौत हो गई। परिजन उसके शव का पीएम कराने के लिए पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। रास्ते में इतनी कीचड़ थी कि बड़ी मुश्किल से पीएम हाउस तक पहुंच पाए। इसके बाद जैसे ही शव को अंदर रखा बारिश शुरू हो गई। शव के साथ जो परिजन थे वह बचने के लिए टीन शेड के नीचे खड़े हुए, लेकिन उसमें से भी पानी टपक रहा था। वह लोग पूरे गीले हो गए। करीब दो घंटे तक वह भीगते रहे। इसके बाद गीले कपड़ों में ही उन्हें शव लेकर जाना पड़ा।