
सरकारी जमीन से जुड़े मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव राजस्व विवेक कुमार पोरवाल को नोटिस जारी कर पूछा है कि अदालत में झूठा हलफनामा दाखिल करने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार और उसके अधिकारी सरकारी जमीन के मालिक नहीं बल्कि केवल ट्रस्टी हैं, जिनका कर्तव्य है कि वे सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करें। लेकिन रिकॉर्ड से ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारी वर्षों तक फाइलों को दबाकर बैठे रहे और जिम्मेदारी तय करने के बजाय एक कर्मचारी पर पूरा दोष डालने की कोशिश की गई। इस तरह की कार्यप्रणाली से यह संदेह पैदा होता है कि कहीं अधिकारी निजी व्यक्तियों को फायदा पहुंचाने के लिए जानबूझकर देरी तो नहीं कर रहे। 12 मार्च को याचिका पर फिल से सुनवाई होगी। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया की एकलपीठ में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार द्वारा दायर अतिरिक्त स्टेटस रिपोर्ट पर गंभीर आपत्ति जताई गई। अदालत ने पाया कि रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया गया है और यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किन अधिकारियों की गलती से वर्षों तक मामला लंबित रहा। राज्य सरकार के अधिकारी बार-बार ऐसे तरीके अपनाते हैं जिससे अपील समय पर दाखिल न हो और बाद में देरी के आधार पर मामला खारिज हो जाए। इससे निजी पक्षों को फायदा पहुंचने की आशंका रहती है। हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि कलेक्टर ग्वालियर की रिपोर्ट के आधार पर केवल कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई, जबकि अन्य अधिकारियों को क्यों जिम्मेदारी से मुक्त किया गया इसका कोई स्पष्ट कारण रिकॉर्ड में नहीं है। राज्य सरकार के जवाब में अस्पष्ट और अधूरी जानकारी दी जा रही है, जिससे न्यायालय को सही स्थिति समझने में कठिनाई हो रही है। क्या है मामला - दीनारपुर में सीलिंग की 9 बीघा जमीन है। सिविल न्यायालय में शासन जमीन का केस हार गया था। इसके बाद 2008 में प्रथम अपील दायर की, लेकिन यह अपील अदम पैरवी में 2012 में खारिज हो गई, लेकिन इस अपील को सुनवाई में लाने के लिए 2019 में आवेदन पेश किया। इस मामले की सुनवाई जस्टिस जीएस अहलूवालिया बैंच में चल रही है। कोर्ट ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई का ब्यौरा मांगा था। 25 हजार के हर्जाने के बाद भी नहीं सुधरे कोर्ट ने कहा कि उन्होंने अदालत के समक्ष गलत हलफनामा दाखिल कर न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास किया। पहले भी उन पर 25 हजार रुपए की लागत लगाई जा चुकी है, फिर भी सुधार नहीं हुआ। - कलेक्टर ग्वालियर की रिपोर्ट के आधार पर कुल चार अधिकारियों को जिम्मेदार बताया गया। इनमें से दो अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकी। बाकी दो अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई। - रिपोर्ट में कहा गया कि तत्कालीन एसडीएम अश्विनी कुमार रावत को 27 फरवरी 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और उनका जवाब अभी प्राप्त होना बाकी है। -राजस्व निरीक्षक राम सेवक मांझी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
Published on:
11 Mar 2026 11:06 am
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