
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने श्योपुर नगर पालिका अध्यक्ष के मामले में राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई है। अदालत ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार के कारण ही मामला बार-बार टल रहा है और अंतिम सुनवाई आगे बढ़ रही है। ज्ञात है कि श्योपुर नगर पालिका अध्यक्ष के निर्वाचन को याचिका में चुनौती दी है। कोर्ट ने अध्यक्ष को काम करने से रोक दिया है। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया की एकलपीठ में सुमेर सिंह बनाम रेनू गर्ग प्रकरण की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता की ओर से कहा गया कि मुख्य सचिव फिलहाल अवकाश पर हैं, इसलिए जांच पूरी करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार ने ही आदेश 7 नियम 11 सीपीसी के तहत दायर आवेदन की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़कर यह विवाद खड़ा किया है। पेंडोरा बॉक्स खोल दिया है। इसलिए मामले की बार-बार सुनवाई टल रही है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसे इस बात में रुचि नहीं है कि सरकार किसी अधिकारी या शासकीय अधिवक्ता के खिलाफ कार्रवाई करती है या नहीं, बल्कि अदालत की प्राथमिकता मामले का अंतिम निराकरण करना है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि यदि राज्य सरकार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के रुख को छोड़ दे तो अदालत उसी दिन मामले की अंतिम सुनवाई कर सकती है। लेकिन सरकार ने मुख्य सचिव की जांच रिपोर्ट के लिए समय देने की मांग पर ही जोर दिया। अदालत ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार के अड़ियल रवैये के कारण ही मामला लंबित हो रहा है। इसके बाद मामले की सुनवाई 20 मार्च 2026 तक के लिए स्थगित कर दी गई। साथ ही अंतरिम आदेश को अगली तारीख तक जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर व कमिश्नर की भूमिका की होनी है जांच 19 फरवरी को हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि सरकार द्वारा दोषी अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने के बजाय मामले को उलझाया जा रहा है। अदालत ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे कलेक्टर कम रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका और चंबल कमिश्नर के आचरण की जांच कर स्पष्ट रिपोर्ट पेश करें। मंगलवार को यह रिपोर्ट पेश करनी थी, लेकिन रिपोर्ट नहीं आई।
Published on:
11 Mar 2026 11:03 am
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