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कानून प्रक्रिया का दुरुपयोग के साथ न्याय के साथ छेड़छड़ा है, याची का आचरण निंदनीय है: कोर्ट

पांच हजार रुपए का हर्जाना भी लगाया, परिवहन आरक्षक ने अपने निलंबन को समाप्त कराने के लिए दायर की थी याचिका

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कानून प्रक्रिया का दुरुपयोग के साथ न्याय के साथ छेड़छड़ा है, याची का आचरण निंदनीय है: कोर्ट

कानून प्रक्रिया का दुरुपयोग के साथ न्याय के साथ छेड़छड़ा है, याची का आचरण निंदनीय है: कोर्ट

हार्ईकोर्ट की एकल पीठ एक याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं ने कानून प्रक्रिया का दुरुपयोग के साथ-साथ न्याय प्रक्रिया में छेड़छाड़ की है। याचिकाकर्ताओं का आचरण निंदनीय हैं। इसलिए 5 हजार रुपए का हर्जाना लगाया जाता है। इस राशि को बच्चों के वेल्फेयर के लिए काम कर रही संस्था के खाते में जमा करने होंगे। साथ ही अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक खेडक़र आदेश दिया है कि इंदौर, जबलपुर बैंच से तथ्यों को छिपाकर राहत ली है, उसकी गलती को दुरुस्त किया जाए। इसके लिए न्यायालय में आवेदन पेश करें। याचिका की सुनवाई जस्टिस आनंद पाठक ने की।

दरअसल कैलाश कुमार निमोरिया का चयन परिवहन आरक्षक के पद पर हुआ था। व्यापमं फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर कैलाश कुमार सहित 17 आरक्षकों पर अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज हुआ। न्यायालय में चालान पेश होने के बाद 17 आरक्षकों को निलंबित कर दिया गया। निलंबित आरक्षकों ने हाईकोर्ट की जबलपुर, इंदौर बैंच में याचिकाएं दायर की। याचिका में तथ्यों को छिपाया गया। आरक्षकों को लाभ मिल गया और परिवहन विभाग ने आरक्षकों को बहाल कर दिया। आरक्षक कैलाश निमोरिया ने जबलपुर व इंदौर बैंच से हुए आदेश के आधार पर ग्वालियर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। समानता का हवाला देते हुए निलंबन को बहाल करने की मांग की। इसका अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक खेडक़र ने विरोध किया। कहा कि चालान पेश होने के बाद निलंबित किया गया है। याचिका में तथ्यों को छिपाया गया है। कोर्ट तथ्यों को देखने के बाद कहा कि गलती को सुधारा जाए। साथ ही आदेश की कॉपी परिवहन आयुक्त को भेजी जाए। कोर्ट ने 30 मार्च 2022 को जो आदेश दिया है, उसमें सुधार के लिए आवेदन पेश किया जाए।

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