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संगीत सभा में सुर और साज की खूब जमी महफिल

गंगादास की बड़ीशाला में रागायन कार्यक्रम

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संगीत सभा में सुर और साज की खूब जमी महफिल

संगीत सभा में सुर और साज की खूब जमी महफिल

ग्वालियर.

सांगीतिक संस्था रागायन की मासिक संगीत सभा में गंगादास की बड़ी शाला में रविवार को खूब सजी। सभा में सजग माथुर से लेकर डॉ वीणा जोशी और बदायूं से तशरीफ लाए मुज्तबा हसन ने सुर साज की इस महफिल में खूब रंग बिखेरे।
कार्यक्रम की शुरुआत सजग माथुर के एकल तबला वादन से हुई। उन्होंने तीन ताल में अपना वादन पेश किया। उन्होंने पेशकार से शुरू करके इस ताल में कुछ कायदे, रेले, गतें और टुकड़े पेश किए। उनके साथ सारंगी पर जनाब अली अहमद ने लहरा दिया।

ऐसो नटखट है छैल नंद
अगली प्रस्तुति में गायिका डॉ वीणा जोशी का खयाल गायन हुआ। उन्होंने राग मधमाद सारंग का चयन किया। इस राग में उन्होंने दो बंदिशें पेश की। एकताल में निबद्ध विलंबित बंदिश के बोल थे सुन लो मोरी श्याम, जबकि तीनताल में मध्यलय की बंदिश के बोल थे ऐसो नटखट है छैल नंद। इन दोनों ही बंदिशों को वीणा ने कौशल से गाया। आपने गायन का समापन भजन बाजे मुरलिया बाजे से किया। आपके साथ हारमोनियम पर पंडित महेशदत्त पांडे और तबले पर डॉ विनय विन्दे ने संगत की।

सितार और सारंगी की जुगलबंदी
सभा का समापन सितार और सारंगी की जुगलबंदी से हुआ। सितार पर थे बदायूं से जनाब मुज्तबा हसन, जबकि सारंगी पर थे जनाब मोहम्मद अहमद। दोनों ने अपने वादन के लिए राग मधुवंती का चयन किया। संक्षिप्त आलाप के साथ आपने इस राग में तीन गतें पेश की। विलंबित गत रूपक में निबद्ध थी जबकि मध्य एवं द्रुत लय की गतें तीन ताल में निबद्ध थी। आपने दादरा की धुन से वादन का समापन किया। आपके साथ तबले पर डॉ मुकेश सक्सेना ने संगत की।