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Tulsidas Jayanti 2023: यंगस्टर्स को साहित्य से जोड़ने के लिए दोहे के साथ हिन्दी में लिखकर लगाए 26 शिलालेख

परिसर में तुलसीकृत रामचरितमानस की जुलाई 1888 और 1901 की दो प्रतियां भी रखी हुई हैं.....

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Tulsidas Jayanti

ग्वालियर। रामचरितमानस जैसे महाकाव्य की रचना करने वाले गोस्वामी तुलसीदास की आज 526वी जयंती है। उनकी इस रचना को आज भी लोग पढ़ते हैं। नई पीढ़ी को गोस्वामी तुलसीदास के साहित्य से जोड़ने के लिए ग्वालियर के फूलबाग स्थित मानस भवन में तुलसी मानस प्रतिष्ठान की ओर से तुलसी साहित्य परिसर तैयार किया गया है। इस परिसर में तुलसीदास की रामचरितमानस के अलग-अलग प्रमुख कांड के अंशों के रूप में दोहे शिलालेख पर उतारे गए हैं। संस्था का मानना है कि युवाओं को इसके जरिए अपने अमर महाकाव्य की जानकारी मिलेगी, इसी उद्देश्य के साथ यहां 26 शिलालेख लगाए गए हैं।

अन्य प्रचलित रचनाएं भी साहित्य परिसर में

तुलसी साहित्य परिसर में लगाए गए शिलालेख पर गोस्वामी तुलसीदास की प्रचलित रचनाओं में रामचरितमानस, रामलला नहहू, वैराग्य संदीपनी, बरवै रामायण, पार्वती-मंगल, जानकी-मंगल, रामाज्ञा प्रश्न, दोहावली, कवितावली, गीतावली, श्रीकृष्ण गीतावली, विनय-पत्रिका, सतसई, छंदावली-रामायण, संकट मोचन, करखा रामायण, छप्पय रामायण, कवित रामायण, कलि धर्माधर्म निरूपण, हनुमान चालीसा, हनुमान बाहुक आदि का भी उल्लेख किया गया है।

नई पीढ़ी तक पहुंचे साहित्य

तुलसी मानस प्रतिष्ठान के अध्यक्ष अभय पापरीकर और सचिव महेश मुद्गल ने बताया कि हमारी जिम्मेदारी बनती है कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक इन अमर रचनाओं को पहुंचाया जाए। 26 शिलालेख में उनकी प्रमुख रचनाओं के मुख्य अंश लिखे गए हैं। लोगों को तुलसीदास के साहित्य की जानकारी मिल सके, यही सोचकर इस परिसर को तैयार किया गया है।

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