17 जुलाई 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

300 करोड़ बहाए, फिर भी जल संकट का डर, टैंकर-बोरिंग पर फिर 5 करोड़ खर्च की तैयारी

2 min read
Google source verification
gwalior water crisis

शहरभर में विभिन्न स्थानों पर बोरवेल खराब होने से पानी की किल्लत हो रही है।

अमृत-1, उदय प्रोजेक्ट और 15वें वित्त आयोग के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था, अब बैकअप के नाम पर नया खर्च

अच्छी बारिश के बावजूद शहर में जल संकट की आहट सुनाई दे रही है। नगर निगम के पीएचई विभाग ने एक बार फिर लगभग 5 करोड़ रुपए का प्लान तैयार कर लिया है, जिसमें 100 टैंकर, 100 नलकूप (बोरिंग) और 40 हैंडपंप लगाकर पानी पहुंचाने की तैयारी है और इसके टेंडर भी जारी हो चुके हैं। लेकिन सवाल यह है कि अमृत योजना, एडीबी योजना सहित अन्य में 300 करोड़ से ज्यादा खर्च किए जाने के बाद भी यह स्थिति आखिरकार क्यों बन रही है। क्यों बार-बार टैंकर और बोरिंग पर निर्भर होना पड़ रहा है। अफसरों ने गर्मी आते ही फिर ‘जल संकट’ का डर दिखाकर नया खर्च प्रस्तावित कर दिया गया है। बता दें कि अमृत प्रोजेक्ट-1 में 278.35 करोड़ खर्च हो चुके हैं, पिछले साल जल संकट पर 6.92 करोड़ और उड़ाए गए, फिर भी समस्या जस की तस। अब अमृत-2 की ओर बढ़ रहे अफसर, लेकिन शहरवासियों को राहत आखिरकार कब मिलेगी।

अब तक जलसंकट के नाम पर खर्च हुई राशि

अमृत प्रोजेक्ट 1: जलालपुर में 160 एमएलडी के प्लांट पर 53.65 करोड़, 42 पानी की टंकियों पर 40 करोड़, फीडर पानी की लाइन 59.5 किमी एरिया में डालकर 18 करोड़ रुपए खर्च हुए। 122 करोड़ में 777 किलोमीटर में पानी की लाइन डाली गईं और मोतीझील प्लांट व अन्य कार्य पर 45.6 करोड़ रुपए खर्च किए गए।
साल 2024-25 में भी ये कार्य किए : निगम ने जल संकट के नाम पर पिछले साल 80 नलकूप के नाम पर 2.96 करोड़ रुपए की राशि खर्च की गई। इसके साथ 100 से अधिक टैंकर मय चालक के लगाकर 1.40 करोड़ खर्च किए। 20 हैंडपंप लगाने के नाम पर 55 लाख की राशि रखी गई थी।
15वें वित्त आयोग: केंद्र सरकार ने 15 वें वित्त आयोग में 28 करोड़ तीन विधानसभा क्षेत्र में खर्च किए गए। निगम ने इस राशि से पुरानी लाइनों को हटाकर नई और जहां अमृत प्रोजेक्ट-1 में लाइनें रह गई थी वहां पर पानी की लाइन डालने का काम किया। हालांकि उसके बाद भी कई स्थानों पर आज भी लाइन नहीं डाली गई है।

इस बार ऐसे होगी राशि खर्च
पीएचई विभाग ने वार्ड-1 से 66 में कुछ स्थान चिन्हित किए हैं,जहां पानी की समस्या हो सकती है। इनके लिए निगम ने प्लान बनाया है। पानी पहुंचाने के लिए एक करोड़ से ज्यादा की लागत से 100 टैंकरों को ठेके पर और 100 नलकूप निर्माण व 40 हैंडपंप लगाने पर लगभग 5 करोड़ खर्च होंगे।

अमृत योजना-01 व उदय प्रोजेक्ट के तहत शहर में वाटर लाइन और टंकी बनाने का कार्य भी हुआ है। लेकिन गर्मी में पानी का संकट न बने,इसके लिए बैकअप तैयार किया गया है। जब पानी की समस्या ज्यादा होगी तब हम बोरिंग और टैंकरों के माध्यम से सप्लाई कराएंगे। इनके टेंडर लगाए जा चुके है।
संजीव कुमार गुप्ता, कार्यपालन यंत्री पीएचई नगर निगम

बड़ी खबरें

View All

ग्वालियर

मध्य प्रदेश न्यूज़

ट्रेंडिंग