
150 फीट गहरी लापरवाही की खदानों में हर वर्ष भर जाता है पानी, इस बार भी रहेगा खतरा
ग्वालियर. गड्ढे भरने की शर्त के साथ लगाए गए क्रेशर के संचालकों ने लीज खत्म होने के बाद गड्ढों को नहीं भरा है। सरकारी लापरवाही और खदान संचालकों के लालच की वजह से छूटे 150 से 300 फीट तक गहरे ये गड्ढे हर वर्ष मासूम बच्चे और युवाओं की जान ले रहे हैं। शहरी क्षेत्र में इन गड्ढों में कूदकर लोग आत्महत्या तक कर लेते हैं। फिर भी इन जानलेवा गड्ढों को भरने या भरवाने या फिर सुरक्षित करने का काम प्रशासन नहीं कर रहा है। प्रत्येक खदान संचालक को पत्थर निकालने की अवधि समाप्त होने के बाद खदान से निकाले गए वेस्ट मटेरियल से ही गड्ढों को भरने का नियम है। इसी तरह रेत निकालने के लालच में खनन माफिया ने ङ्क्षसध नदी में 50 से ज्यादा रेतीले दलदल बनाकर जानलेवा बना दिया है। हर वर्ष इस नदी में तीन से चार बच्चे और युवक अपनी जान गंवाते हैं। दुर्घटनाओं का कारण बनने वाले इन गड्ढों को भरने और सावधानियां अपनाने के लिए अभी तक पांच बार सख्त आदेश निकल चुके हैं, लेकिन इन आदेशों का पालन अभी तक एक भी खदान संचालक ने नहीं किया। इस बार सावधानी नहीं अपनाई तो फिर से बारिश के सीजन में बच्चों और किशोरों के डूबने का खतरा बना रहेगा।
सबसे ज्यादा खतरा किसको
नगर निगम क्षेत्र में शंकरपुर, पुरानी छावनी, शताब्दीपुरम, मऊ-जमाहर, साडा क्षेत्र के गांव, डबरा क्षेत्र के बिलौआ, अजयगढ़, रायपुर, कैथोदा, सिली-सिलेंटा, विजकपुर, भैंसनारी, भितरवार के बसई, गधौटा, धोबट, पलायछा सहित करीब 45 गांव और बस्तियों के बच्चों पर हर समय खतरा बना रहता है। ये सभी बस्तियां रेतीले दलदल और पत्थर की खदानों के आसपास ही बसी हैं। बच्चे खेलने के लिए निकलते हैं और हर वर्ष दुर्घटना का शिकार होते हैं।
अब तक पांच बाद आदेश
- तत्कालीन कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने सबसे पहले वर्ष 2010 में बंद खदानों के गड्ढे भरने के लिए खदान संचालकों को आदेश जारी किया था। इसकेे बाद कलेक्टर का स्थानांतरण हो गया और गड्ढे और गहरे होते गए।
- वर्ष 2013 में तत्कालीन कलेक्टर पी नरहरि ने जिन खदानों की लीज खत्म हुई थी, उन खदानों में ओवर वर्डन भरने के निर्देश लीज लेने वालों को दिए थे। इस निर्देश के अगले डेढ़ वर्ष तक गड्ढे नहीं भरे और उनका तबादला हो गया।
- वर्ष 2016-17 में तत्कालीन कलेक्टर डॉ संजय गोयल ने सख्ती दिखाकर शंकरपुर, शताब्दीपुरम सहित अन्य क्षेत्रों में गड्ढों को भरवाने की कोशिश की थी, जब यह कोशिश सफल नहीं हुई तो इन गड्ढों को मछली पालन के लिए देने का प्रयास किया गया, लेकिन यह प्रयास सफल होने से पहले ही अचानक कलेक्टर का तबादला हो गया।
- वर्ष 2019 में तत्कालीन कलेक्टर भरत यादव ने गहरी खदानों को औद्योगिक स्तर पर लाभकारी बनाने के लिए चारों ओर फेंङ्क्षसग कराकर मछली पालन करने वाले समूहों को देने का प्लान बनाया था, लेकिन यह प्रयास पूरा होने से पहले ही उनका अचानक तबादला हो गया।
- वर्तमान कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम ङ्क्षसह ने खदानों के गड्ढे भरने के लिए अभी तक तीन बार प्रयास किए हैं, लेकिन दो वर्ष कोविड प्रोटोकॉल की वजह से यह काम पूरा नहीं हो सका। इस वर्ष भी अभी तक इन गड्ढों को आमजन के लिए सुरक्षित करने का कोई प्रयास नहीं हुआ है।
इसलिए खतरा बने गड्ढे
रेत के दलदल
- हर दिन 1500 हाईवा, डंपर, एलपी गिट्टी, 300 डंपर, हाइवा, एलपी और 350 ट्रॉली रेत और पत्थर ग्वालियर शहर में आ रहा है।
- इस रेत को निकालने के लिए ङ्क्षसध, पार्वती, नोन नदियों में गड्ढे करके रेत के 30 से ज्यादा दलदल बना दिए हैं।
- नदियों में बने इन दलदली गड्ढों में हर वर्ष 10 से 12 पशु और तीन से चार युवा अपनी जान गंवाते हैं।
पत्थर की खाइयां
- शहर में शंकरपुर, शताब्दीपुरम, नयागांव क्षेत्र में उत्खनन बंद होने के बाद अब 50 से ज्यादा गड्ढे हैं।
- गड्ढों को खदान संचालकों ने भरा नहीं है और अब ये खाइयों में बदल चुके हैं।
- 150 से 300 फुट तक गहरे इन गड्ढोंं में बारिश का पानी भर जाता है।
- नहाने के लालच में या फिर दुर्घटनावश हर वर्ष इन गड्ढों में तीन से चार किशोर जान से हाथ धो बैठते हैं।
निर्देश बेअसर
- राज्य सरकार ने हर वर्ष जुलाई से सितंबर तक नदियों से उत्खनन पर स्थाई रोक लगाई है। इसको लेकर आदेश भी जारी होता है, लेकिन इस आदेश का कोई पालन नहीं करता और न ही कोई प्रशासनिक या पुलिस का अधिकारी अवैध उत्खनन रोकने के लिए राज्य सरकार के आदेश का पालन कराता है।
- नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने खतरनाक खदानों को भरने के लिए लगातार दिशा निर्देश जारी किए हैं, इनका पालन अभी तक किसी भी खदान संचालक ने नहीं किया। माइङ्क्षनग अधिकारी भी खदान संचालकों के दबाव में एनजीटी को वास्तविक रिपोर्ट बनाकर नहीं भेजते।
भ्रमण कर लगातार नजर बनाए रखने निर्देश दिए हैं
बारिश की अवधि में नदी से रेत उत्खनन बंद है। हमने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्र में लगातार भ्रमण कर नदी की स्थिति पर नजर बनाए रखें। जहां तक बंद खदानों की बात है तो इन पर दुर्घटना से बचाव की सावधानियां अपनाने के लिए निर्देश जारी करते हैं। जहां जरूरी होगा बोर्ड भी लगवाएंगे।
कौशलेन्द्र विक्रम ङ्क्षसह, कलेक्टर
Published on:
23 Jul 2022 06:43 pm
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