
sikar neemkathana bandh
ग्वालियर। शहर में हुई बरसात से शहर पर गहराया जल संकट फिलहाल टला नहीं हैं। हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। तिघरा को अब भी भरने के लिए २३ फीट पानी की जरूरत है। इसके लिए जरूरी है कि बरसात शहर की जगह घाटीगांव से मोहना के बीच हो तभी तिघरा के केचमेंट एरिया में पानी जमा होगा और शहर को जल संकट से राहत मिलेगी। बहरहाल पूरे देश में बरसात होने से कई जगह बाढ़ के हालात बने हैं तो वहीं ग्वालियर अब भी सूखे की मार से जूझ रहा है। जिसके चलते अफसरों का धैर्य भी जवाब दे रहा है।
ककेटो-पेहसारी खाली
इसके लिए तिघरा बांध से जुड़े इंजीनियरों ने सुंदरकांड का आयोजन रखा है। वहीं पीएचई का अमला धुंआ वाले हनुमान मंदिर पर भगवान को मनाने में लगा हुआ है। अफसरों की मानें तो अगर अभी भी अच्छी बारिश नहीं हुई तो शहर को अब तक के सबसे भयानक हालात से जूझना होगा क्योंकि तिघरा को भरने के लिए ककेटो और पेहसारी बांध भी पहले ही खाली चुके हैं।
इसके लिए अब जरूरी है कि लोग कम पानी का उपयोग करें, वाटर हार्वेस्टिंग से पानी को रोकें कुएं बावड़ी मेंं आस पास की कॉलोनियों की छतों सड़कों और पार्कों का पानी पहुंचाए तो जल संकट से लोगों को आने वाले समय में राहत मिल सकती है।
चार दिन की बारिश का तिघरा पर असर
दिनांक फीट में बढ़त
11 जुलाई 713.60
12जुलाई 714.30
13जुलाई 714.40
14जुलाई 715.70
नोट: इस अंतराल में करीब पौने दो फीट पानी 150 एमसीएफटी बढ़ा लेकिन 30 एमसीएफटी पानी सप्लाई होने से घट भी गया। जिससे 120 एमसीएफटी पानी जो कि करीब 12 दिन का पानी बताया गया है।
एेसे समझें तिघरा को
वर्तमान में स्थिति -समुद्रतल से 715 फीट, 753.06 एमसीएफटी से अधिक पानी मौजूद है।
आवश्यकता- समुद्रतल से 738 फीट- पर 4059.648 एमसीएफटी पानी की आवश्यकता हे बांध को भरने के लिए
अधिकतम-समुद्रतल से 740 फीट- पर4459.208 एमसीएफटी पानी भरता है लेकिन बांध पुराना होने से दो फीट खाली ही रखा जाता है।
"जल संकट अभी टला नही हैं। लोगों को कम पानी में जरूरतों को पूरा करना सीखना होगा। वरना मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।"
आरएलएस मौर्य, अधीक्षण यंत्री पीएचई नगर निगम
Published on:
15 Jul 2018 02:47 pm
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