11 मई 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

शिव आराधना से मिलता है ज्ञान, वैराग्य, क्षमा और भक्ति

सात दिवसीय शिव महापुराण कथा ज्ञान महायज्ञ में संत रामप्रसाद महाराज ने किया प्रथम संहिता का वर्णन

2 min read
Google source verification
shiv_mahapuran_katha_gyan_mahayagya.jpg

ग्वालियर। रुद्र का अर्थ होता है शिव एवं अक्ष का अर्थ होता है आंसू। अर्थात ये शिव के नेत्रों से प्रेम और करुणा भरे जीवन की सार्थकता के फलस्वरूप धरती पर गिरे आंसू रुद्राक्ष के रूप प्रकृति में विद्यमान हैं। यह विचार बड़ोदा गुजरात से आए अंतरष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के संत रामप्रसाद महाराज ने वैशाख के पवित्र माह में मधुबन एनक्लेव स्थित रामेश्वर महादेव पर रविवार से शुरू हुए सात दिवसीय शिव महापुराण कथा ज्ञान महायज्ञ के दूसरे दिन प्रथम संहिता का वर्णन करते हुए रुद्राक्ष महिमा बताते हुए व्यक्त किए।

उन्होंने आगे कहा कि शिव आराधना से ज्ञान, वैराग्य, क्षमा एवं भक्ति की प्राप्ति होती है। शिव कृपा से भाग्य भी बदला जा सकता है। कथा में शिव पूजन रहस्य, शिव तत्व रहस्य, प्रणव मंत्र और पंचाक्षर मंत्र का महत्व बताते हुए आगे कहा कि लोगों मे शिवलिंग को लेकर अनेक श्रांतिया हैं कि घर में शिवलिंग की पूजा नहीं की जा सकती है।

परंतु शिवपुराण में वर्णित है कि घर में स्टफीक, धातु, सोने, चांदी आदि के ठोस ऐसे शिवलिंग का पूजन किया जा सकता है जिसकी ऊंचाई 6 इंच से ज्यादा न हो और जो स्थिर न होकर चलायमान हो क्योंकि घर में शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा नहीं हो सकती है और जहां शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा हो जाती है वहां शिव का निवास हो जाता है। उन्होंने कहा कि शिव के पूजन के लिए 3 चीजें जरूरी हैं। पहला शिव नाम का उच्चारण, दूसरा माथे पर भस्म का तिरपुण्ड एवं गले में रुद्राक्ष।

भूल का प्रायश्चित न करने वाला इंसान नहीं जानवर
संत रामप्रसाद ने महाराज ने बताया कि मानव जीवन में गलतियां होना स्वाभाविक हैं परंतु गलत होता है उन पर पर्दा डालना। उन गलतियों की पुनरावृत्ति करना एवं अपनी भूल का प्रायश्चित न करने वाला मनुष्य न होकर जानवर है। शिव के पंचाक्षर मंत्र की माला का जाप करने से किसी का अपमान करने का दोष दर हो जाता है।