
mobile addiction
कोविडकाल के समय बड़ी तादाद में बच्चे स्कूल नहीं जा पाए। पढ़ाई के लिए उन्हें पालकों ने मोबाइल दिए थे। बच्चे पढ़ाई तो दूर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आइडी बनाकर शॉर्ट रील देखना पसंद कर रहे हैं। काउंसलर की मानें तो उनके पास सैंकड़ों केस ऐसे हैं, जिनमें माता-पिता ने बच्चों के रील की आदत से परेशान होकर मदद मांगी।
इस तरह आ रहीं शिकायतें
काउंसलर ने बताया, करीब 13 साल का बच्चा रात में कई घंटे लगातार मोबाइल देखता था। जब उसके स्कूल जाने का समय होता तो परिजन को उससे मोबाइल छीनना पड़ता था। वह स्कूल से लौटकर मोबाइल की मांग करता। इस वजह से पढ़ाई प्रभावित होने लगी। रिजल्ट में नंबर कम आने लगे। उसने धीरे-धीरे अपने दोस्तों के साथ खेलना बंद कर दिया। उसका स्वभाव चिड़चिड़ा हो गया। परिवार उसका मोबाइल बंद करता तो उसे रोने लगता। बच्चे को काउंसलिंग के लिए लाए तो सबसे बड़ी परेशानी संवाद करने की थी। लंबी प्रक्रिया के तहत बच्चे को धीमे-धीमे सोशल मीडिया की लत छुड़ाई गई। माता-पिता ने भी बताया कि बच्चे की इस आदत की वजह से घर में कलह होने लगी थी।
ऐसे पहचानें लत - डॉ माया बोहरा, पुर्नवास मनोवैज्ञानिक
- किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की मदद से बच्चा सोशल मीडिया पर कनेक्ट होता है तो वह उत्साहित हो जाता है। समूह के साथ न रहते हुए वह अकेले रहना पसंद करता है। बलपूर्वक सोशल मीडिया से दूर करना या उसमें कटौती करने पर वह क्रोधित होता है।
- बच्चा वास्तविकता से परे होकर काल्पनिक दुनिया में उलझा रहता है। उसका किसी काम में मन नहीं लगता। कोई भी काम करते समय वह दूसरी बातें सोचता रहता है। उसे स्वास्थ्य संबंधी समस्या जैसे मोटापा बढ़ना, खानपान में लापरवाही, वजन बढ़ना, पाचनशक्ति कमजोर होना, धुंधली दृष्टि, सिरदर्द का अनुभव, अनिद्रा की समस्या हो जाती है।
ऐसे छुड़वाएं लत
-बच्चों से मोबाइल की लत छुड़वाने के लिए धीमे-धीमे प्रयास करें।
-बच्चों के मोबाइल देखने के समय के लिए पालक टाइम लिमिट सेट करें। न मोबाइल बंद करें और न ही इंटरनेट।
-बच्चे रील से कमाने का सोचते हैं। उन्हें उसके अच्छे-बुरे के बारे में बताएं।
Published on:
14 Feb 2024 01:40 pm

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