घग्घर नाली बेड में चल रहा 6300 क्यूसेक पानी, बाढ़ का खतरा बढ़ा
– घग्घर साइफन पर गत सात दिन में दस हजार क्यूसेक बढ़ा पानी, 21 हजार क्यूसेक पानी हो रहा प्रवाहित
– ओटू हेड से राजस्थान के लिए पानी की मात्रा में बढ़ोतरी, 40 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी प्रवाहित
– घग्घर नाली बेड में छह हजार क्यूसेक से अधिक पानी
हनुमानगढ़. गत एक सप्ताह में घग्घर साइफन पर दस हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी की मात्रा बढ़ चुकी है। अतिक्रमण से ग्रस्त घग्घर नाली बेड की वर्तमान क्षमता 5500 क्यूसेक बताई जाती है। शुक्रवार सुबह नाली बेड में 6300 क्यूसेक पानी प्रवाहित हो रहा था। अभी इसकी मात्रा और बढऩे की संभावना है। जाहिर है कि खतरे के निशान से ऊपर पानी चल रहा है।
यही स्थिति ओटू हेड की है। यहां से राजस्थान के लिए प्रवाहित की जा रही पानी की मात्रा पिछले एक सप्ताह में 12 हजार क्यूसेक से ज्यादा बढ़ चुकी है। इतनी मात्रा में पानी की आवक से घग्घर नदी लबालब हो चुकी है। इसके बावजूद पीछे अभी और पानी की आवक की संभावना है। इन हालात में जिले में बाढ़ का खतरा निरंतर बना हुआ है। इंटेक्स स्ट्रक्चर से घग्घर नदी का पानी इंदिरा गांधी फीडर में निरंतर डाला जा रहा है। मगर पानी की निरंतर भारी आवक से बाढ़ की चिंता बनी हुई है। पानी की मात्रा लगातार बढऩे के कारण नाली बेड में घग्घर के बंधों को मजबूत करने और उनकी निगरानी का कार्य निरंतर जारी है। प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ घग्घर के आसपास बसे गांवों के लोग भी बंधों पर पहरा दे रहे हैं। रात्रि के समय जन पहरे के कारण कहीं भी बंधा कमजोर होता है तो तत्काल उसकी सूचना प्रशासन तक पहुंचाई जा सकती है। इसके लिए जिला प्रशासन ने तीन अलग-अलग कंट्रोल रूम भी स्थापित कर रखे हैं।
एक सप्ताह में कितना बढ़ा पानी
ओटू हैड से 15 जुलाई को 26 क्यूसेक से कम पानी प्रवाहित किया जा रहा था, वह शुक्रवार सुबह बढकऱ 40 हजार क्यूसेक तक जा पहुंचा है। इससे जीडीसी में भी पानी की मात्रा बढ़ गई है। घग्घर साइफन में सात दिन पहले 1200 क्यूसेक से कम पानी चल रहा था जो शुक्रवार को बढकऱ करीब 21 हजार क्यूसेक हो गया। घग्घर नाली बेड में 4800 क्यूसेक पानी ही चलाया जा रहा था जो अब बढकऱ 6300 क्यूसेक से ज्यादा हो चुका है। जबकि घग्घर क्षेत्र में निरंतर बढ़ते अधिक्रमण आदि के कारण वर्तमान में इसकी क्षमता 5500 क्यूसेक ही बताई जाती है। जाहिर है कि क्षमता से अधिक पानी प्रवाहित होने के कारण कभी भी बाढ़ का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा आरडी 42 जीडीसी पर 14500 क्यूसेक पानी प्रवाहित हो रहा है।