
सुरक्षा में ऊपर-नीचे का फेर, अभय कमांड सेंटर से नहीं जुड़ सके कैमरे
-निगरानी के अभाव में अधरझूल में पड़ा प्रोजेक्ट
हनुमानगढ़. शहर को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से एसपी कार्यालय में अभय कमांड सेंटर की स्थापना की गई थी। लेकिन हकीकत यह है कि सेंटर स्थापित करने के बाद सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा फाइबर ऑप्टिकल्स लाइनें बिछाने का काम अधरझूल में लटका हुआ है। पहले तो नई सरकार ने इस प्रोजेक्ट की तरफ ध्यान नहीं दिया, और अब रेलवे की भूल-भुलैया के चलते कैमरे लगाने तथा लाइनें बिछाने का काम प्रभावित हो रहा है। बताया जा रहा है कि टाउन व जंक्शन में कैमरे लगाने तथा इसको अभय कमांड सेंटर से जोडऩे के लिए सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने रेलवे से लाइन क्रासिंग को लेकर नवम्बर २०१८ में ओवरब्रिज के पास से अनुमति देने की मांग की थी। परंतु रेलवे ने ओवरब्रिज की जगह अंडरब्रिज समझकर नीचे से लाइन निकालने संबंधी अनुमति जारी कर दी। इसके चलते अब सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधिकारी दोबारा अनुमति पत्र तैयार कर रेलवे से समन्वय बना रहे हैं। प्रोजेक्ट के तहत टाउन व जंक्शन में ४५० कैमरे लगने हैं। लेकिन अभी तक टाउन में एक भी कैमरे नहीं लगे हैं। प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों का कहना है शहर को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से अभय कमांड सेंटर की स्थापना की गई है। इसके तहत सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा फाइबर ऑप्टिक्लस के जरिए जोडऩे का काम होना है। इसके तहत १०० नंबर पर कॉल करते ही इसे सेंटर में फारवर्ड करने की योजना है। कैमरों और रेडियो फ्रिक्वेंसी के सहारे अपराध करने के बाद भागने वाले अपराधियों को पकडऩे में यह कैमरे अहम साबित हो सकते हैं।
अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक चंद्रेश गुप्ता ने बताया अभय कमांड सेंटर प्रोजेक्ट के तहत शहर में कैमरे लगाने की गति काफी धीमी है। इस संबंध में सूचना प्रौद्योगिकी विभाग से समन्वय बनाकर गति तेज करने का प्रयास कर रहे हैं। रेलवे की तरफ से लाइन क्रासिंग को लेकर जो समस्या आ रही थी, उसका समाधान करने का प्रयास जारी है। निश्चित तौर पर कैमरे लगने के बाद शहर और सुरक्षित हो सकेगा।
कई मामलों में खुलासा
बताया जा रहा है कि एसपी कार्यालय के पास बनाए गए अभय कमांड सेंटर से कलक्ट्रेट के आसपास में लगे करीब १५ कैमरे जुड़ चुके हैं। इन कैमरों का अभी ऑफलाइन संचालन हो रहा है। इसके बाजवूद इन कैमरों के सहारे कई अपराधिक मामलों का खुलासा पुलिस कर चुकी है। अगर प्रोजेक्ट के तहत सभी कैमरे लग जाते हैं और इनका संचालन रेडियो फ्रिक्वेंसी के सहारे होने लगता है तो अपराधियों तक पहुंचना और आसान हो जाएगा।
चुनाव की निगरानी
अभय कमांड सेंटर के जरिए संवेदनशील मतदान केंद्रों की निगरानी भी हो सकेगी। केंद्रों पर लगे कैमरों को अभय कमांड से जोडक़र संबंधित मतदान केंद्र का आंखों देखा हाल निर्वाचन अधिकारी जान सकते हैं। कुछ माह पूर्व संपन्न विधानसभा चुनाव में इसका प्रयोग भी हो चुका है।
Published on:
14 Apr 2019 12:36 pm
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