
Hanumangarh News : हनुमानगढ़. सरकारी पाठशालाओं में नामांकन बढ़ाने के लिए प्रवेशोत्सव का पहला चरण सोमवार से प्रारंभ होगा। इसके तहत शिक्षकों के जिमे रैली निकालने से लेकर कई तरह के आयोजन डाले गए हैं। मगर हर साल प्रवेशोत्सव के ढोल बजाने के बावजूद सरकारी विद्यालयों में हनुमानगढ़ से लेकर प्रदेश भर में नामांकन कम हुआ है। स्थिति यह है कि हर साल वर्तमान नामांकन का दस प्रतिशत नामांकन नए सत्र में बढ़ाने का लक्ष्य शिक्षा विभाग को दिया जाता है। मगर सब इसका उल्टा रहा है, प्रदेश में पिछले दो सत्र से प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत नामांकन बढऩे की बजाय घट रहा है।
शिक्षकों के रिक्त पद, क्रमोन्नत विद्यालयों में व्यायाता पदों की स्वीकृति नहीं देने, शिक्षकों पर गैर शैक्षणिक कार्यों का भार आदि के चलते नामांकन का आंकड़ा घट रहा है। रोचक यह है कि इस बार डिजिटल प्रवेशोत्सव की जिमेदारी भी शिक्षकों को दी गई है। भले ही शिक्षा मंत्री विद्यालयों में शिक्षकों के मोबाइल फोन लाने पर प्रतिबंध लगाने की बात कह रहे हो। मगर साथ ही शिक्षकों को निरंतर ऐसे कार्य भी दिए जा रहे हैं जो मोबाइल एप से ही संपादित होते हैं। ताजा उदाहरण डिजिटल प्रवेशोत्सव का है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिक्षकों को एंड्रॉइड मोबाइल फोन में प्रवेशोत्सव एप्लिकेशन डाऊनलोड कर विद्यार्थियों के नामांकन को लेकर डोर टू डोर सर्वे करना होगा। ऐसे में मंत्रीजी का मोबाइल फोन पर पाबंदी का मंत्र छूमंतर होता नजर आता है।
17 लाख घटा
बात अगर प्रदेश भर की करें तो पिछले तीन शिक्षा सत्र में करीब 17 लाख विद्यार्थी सरकारी विद्यालयों में कम हुए हैं। जबकि पिछले सत्र में नौ लाख विद्यार्थी सरकारी स्कूल छोड़ गए। शिक्षा सत्र 2023-24 में राज्य के सरकारी विद्यालयों में लगभग 81 लाख विद्यार्थी नामांकित थे। जबकि इससे पहले शिक्षा सत्र 2022-23 में करीब 90 लाख नामांकन था मतलब कि नौ लाख कम हुआ। वहीं शिक्षा सत्र 2021-22 में प्रदेश में कुल 98 लाख विद्यार्थियों का नामांकन था। जाहिर है कि लगातार दो शिक्षा सत्र से सरकारी स्कूलों के नामांकन में कमी आ रही है।
नामांकन कम होने की यह वजह
- सरकारी विद्यालयों में खाली पदों का बढ़ता ग्राफ।
- क्रमोन्नत विद्यालयों में दो-तीन साल बाद भी व्याख्याताओं के पद स्वीकृत नहीं किए गए हैं। इससे क्रमोन्नत कक्षाओं में अपेक्षाकृत नामांकन नहीं।
- पदोन्नति में निरंतर देरी, पिछले चार शिक्षा सत्र से डीपीसी लबित।
- विद्यालयों में स्टाफिंग पैटर्न की समीक्षा नहीं।
- अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम का अलग से कैडर नहीं तथा अन्य पर्याप्त सुविधाएं भी नहीं।
- शिक्षकों की गैर शैक्षणिक कार्यों में व्यस्तता के चलते विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था हो रही प्रभावित।
कैसे करेंगे नामांकन वास्ते सहमत
सबसे ज्यादा दिक्कत वहां है जहां स्कूल भवन से लेकर अन्य तमाम साधन-संसाधानों की भारी कमी है। ऐसे में शिक्षक कैसे प्रवेशोत्सव के दौरान अभिभावकों को अपने सरकारी विद्यालय में बच्चे के नामांकन के लिए सहमत कर पाएगा। अंग्रेजी मीडियम के स्कूल बारहवीं तक के खोल दिए, कमरे वहां मुश्किल से ही छह-सात हैं। इस पर ध्यान देने की जरूरत है। राजेन्द्र सक्सेना, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत।
पाबंदी ठीक, इधर भी मिले मुक्ति
शिक्षकों से कई ऐसे गैर शैक्षणिक कार्य करवाए जा रहे हैं जिससे शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है। शिक्षकों के विद्यालय समय में मोबाइल फोन उपयोग पर प्रतिबन्ध का निर्णय ठीक है। मगर शिक्षकों को विभिन्न प्रकार के गैर शैक्षणिक कार्यों से भी तो मुक्त किया जाए ताकि शिक्षक अपना मूल कार्य अधिक तन्मयता व बेहतर ढंग से कर सके। बसंत कुमार ज्याणी, प्रदेश प्रवक्ता, राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ रेस्टा।
जिले में भी तमाम प्रयासों के बावजूद सरकारी विद्यालयों में नामांकन कम हुआ है। शिक्षा सत्र 2022-23 में 181629 विद्यार्थी सरकारी विद्यालयों में नामांकित थे। जबकि पिछले शिक्षा सत्र 2023-24 में यह आंकड़ा 164436 ही था मतलब कि 17193 विद्यार्थी सरकारी विद्यालयों से दूर हो गए।
Published on:
13 May 2024 04:31 pm
बड़ी खबरें
View Allहनुमानगढ़
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
