
युवा पीढ़ी का किताबों से दूर होना अच्छा संकेत नहीं, इस पर मंथन की जरूरत
युवा पीढ़ी का किताबों से दूर होना अच्छा संकेत नहीं, इस पर मंथन की जरूरत
-कवि मनोज देपावत के काव्य संग्रह 'सच कहती थी तुम' के विमोचन समारोह में बोले वक्ता
हनुमानगढ़. हर शब्द के अलग-अलग भाव होते हैं। अच्छा कवि वही होता है, जो शब्दों के भावों को समझकर साहित्य में इसका उपयोग करता है। यह बात काव्य गोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने कही। साथ ही कहा कि साहित्य की समझ व्यक्ति को हर वर्ग में सम्मान दिलाती है। इसलिए युवाओं को साहित्य के प्रति लगाव पैदा कर इनसे जुडऩे का प्रयास करना चाहिए। आधुनिक युग में युवा वर्ग किताबों से दूर होता जा रहा है, यह अच्छा संकेत नहीं है। हम सबको अपने परिवार से पहल करते हुए बच्चों को साहित्यिक पुस्तकों से जोडऩे का प्रयास करना चाहिए। तभी युवाओं में साहित्य के प्रति समझ पैदा होगी। जिला मुख्यालय पर सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में कवि मनोज देपावत गोलूवाला के काव्य संग्रह 'सच कहती थी तुम' का विमोचन भी किया गया। वरिष्ठ साहित्यकार और बोधि प्रकाशन, जयपुर के संस्थापक मायामृग ने पुस्तक का विमोचन करते हुए कविता की जीवंतता पर विचार रखे। उन्होंने कवि मनोज देपावत को "कविता का शिष्यत्व प्राप्त करने" का संदेश दिया। उनकी लेखनी को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार भगवती पुरोहित कागद ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में शिक्षाविद तरुण विजय,बीकानेर से मोनिका गौड़, श्रीगंगानगर से कृष्ण कुमार आशु, भादरा से पवन शर्मा एवं दीनदयाल शर्मा उपस्थित रहे। इस मौके पर मोनिका गौड़ ने कहा कि यह संग्रह समाज में व्याप्त मुखौटों को हटाकर वास्तविकता को उजागर करता है और कवि देपावत को सत्य के अनुसंधान का रचनाकार बताया। कृष्ण कुमार आशु ने कहा कि किताबों से दूर होती युवा पीढ़ी के लिए यह संग्रह एक मार्गदर्शक साबित होगा। तरुण विजय ने इस तरह के साहित्यिक आयोजनों की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। साहित्यकार दीनदयाल शर्मा ने "नानी' कवित के माध्यम से कवि के बाल मन को उकेरा। अध्यक्ष भगवती पुरोहित ने दिवंगत साहित्यकार ओम पुरोहित कागद के साथ मनोज देपावत की पुरानी स्मृतियों को साझा करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया। कवि मनोज देपावत ने काव्य यात्रा और इस पुस्तक के प्रकाशन की प्रक्रिया को साझा किया। उन्होंने अपनी पुस्तक से शीर्षक कविता 'सच कहती थी तुम' और 'सरहद के उस पार' नामक कविता का पाठ किया। जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। रावतसर से रूपसिंह राजपुरी, रंगलाल बिश्नोई, ओम प्रकाश पाइवाल, नीता अग्रवाल, प्रेम भटनेरी, राजवीर सिंह, गुरदीप सोहल, मोहनलाल, उदयपाल, सरोज शर्मा, एमए राठौर, अदरीश खान, मनोज पुरोहित सहित सभी कवियों ने अपनी उत्कृष्ट कविताओं से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। वृक्षमित्र एवं मानव सेवा संस्थान के सदस्यों के अलावा मनोज स्वामी, सुरेंद्र ओझा, पन्नालाल रोलन, शीशपाल सुथार आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन वीरेंद्र छापोला ने किया।
Published on:
18 Mar 2025 11:42 am
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