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अब जगी सरकार, 325 करोड़ से नदी क्षेत्र को सुरक्षित करने के होंगे प्रयास

हनुमानगढ़. जिले से गुजर रही घग्घर नदी के बहाव क्षेत्र में बाढ़ सुरक्षा की दृष्टि से आने वाले समय में कुछ अहम कार्य करवाए जाएंगे। हनुमानगढ़ जिले में इसके लिए 325 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है।

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अब जगी सरकार, 325 करोड़ से नदी क्षेत्र को सुरक्षित करने के होंगे प्रयास

अब जगी सरकार, 325 करोड़ से नदी क्षेत्र को सुरक्षित करने के होंगे प्रयास

-भविष्य में रिवर फ्रंट की तर्ज पर नदी क्षेत्र को विकसित करने की योजना
-घग्घर नदी क्षेत्र में बाढ़ का खतरा टालने का प्रयास
हनुमानगढ़. जिले से गुजर रही घग्घर नदी के बहाव क्षेत्र में बाढ़ सुरक्षा की दृष्टि से आने वाले समय में कुछ अहम कार्य करवाए जाएंगे। हनुमानगढ़ जिले में इसके लिए 325 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है। राज्य स्तर पर मंजूरी मिलने के बाद अधिकारी अब इस कार्य को शुरू करवाने की तैयारी में जुट गए हैं। जानकारी के अनुसार जीडीसी के कुछ क्षेत्र को पक्का करने के अलावा शहरी क्षेत्र में नदी बहाव वाले एरिया को कुछ जगह से पक्का करने का प्रस्ताव तैयार करवाकर इसे मंजूरी के लिए भिजवाया गया था। इसमें सरकार ने कुछ संशोधन करके स्वीकृति प्रदान कर दी है। घग्घर नदी के बहाव क्षेत्र में बाढ़ सुरक्षा की दृष्टि से कौन-कौन से महत्वपूर्ण कार्य करवाए जाएंगे, इसकी स्थिति अगले सप्ताह तक साफ होने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि जल संसाधन विभाग स्तर पर कुछ कार्य पूर्ण करवाने के बाद स्थानीय नगरपरिषद स्तर पर भी कुछ कार्य करवाए जाएंगे। इसमें शहरी क्षेत्र में नदी तटों को पक्का करने के बाद नाव आदि चलाने की योजना है। भविष्य में रिवर फ्रंट की तर्ज पर उक्त नदी क्षेत्र को विकसित करने की चर्चा है। ताकि शहर सौंदर्यीकरण के साथ ही मानसून के समय शहर सुरक्षित रह सके। अभी नदी क्षेत्र में पांच हजार क्यूसेक पानी की आवक होने पर शहर के लोंगों की बेचैनी बढ़ जाती है। घग्घर बाढ़ नियंत्रण खंड कार्यालय के एक्सईएन नरेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार बजट मिलने की सूचना मिली है। कार्य कौन सा खंड कैसे करेगा इस बारे में जिस तरह की गाइड लाइन हमें मिलेगी, उसके हिसाब से कार्य करवाने का प्रयास रहेगा।

डूब चुका है शहर
वर्ष 1995 में नदी क्षेत्र के जंक्शन व टाउन ओवरब्रिज के पास बंधा टूटने से आधा शहर पानी में डूब गया था। बाढ़ को बीते लंबा समय गुजर गया। लेकिन नदी के बहाव क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे अतिक्रमण को रोकने के लिए किसी स्तर पर ठोस प्रयास नहीं हुए। ना ही कमजोर बंधों को मजबूत करने की पहल हुई। इस वजह से नदी तट लगातार कमजोर होते गए। आज नदी में पांच हजार क्यूसेक पानी चलाने पर भी अफसरों के हाथ-पांव फूलने लगते हैं। अब जाकर सरकार की नींद खुली है। तय समय पर नदी क्षेत्र को सुरक्षित करने के प्रयास पूरे होते हैं तो इससे सबको फायदा होगा।