
निरीक्षण के दौरान पटड़ों की कमजोर स्थिति देख बिफर पड़े मुख्य अभियंता, नदी के गुल्लाचिक्का हैड पर पानी की मात्रा बढकऱ 48534 क्यूसेक हुई
-बोले, 24 घंटे में बदलनी चाहिए स्थिति, नहीं तो अंजाम भुगतने को तैयार रहें अभियंता
हनुमानगढ़. शिवालिक की पहाडिय़ों के आसपास तेज बारिश होने से राजस्थान में घग्घर नदी में पानी का प्रवाह तेज हो रहा है। इससे स्थानीय अफसरों के हाथ-पांव फूल रहे हैं। वहीं नदी क्षेत्र के आसपास बसे गांव के लोगों को भी बाढ़ का खतरा सताने लगा है। हालांकि जिला प्रशासन व सिंचाई विभाग के अधिकारी अभी स्थिति नियंत्रण में बता रहे हैं। परंतु फिर भी अचानक नदी में पानी बढऩे पर एहतियात के तौर पर सुरक्षा के सभी बंदोबस्त किए जा रहे हैं। चार सितम्बर 2025 को घग्घर नदी के गुल्लाचिक्का हैड पर पानी की मात्रा बढकऱ 48534 क्यूसेक होने पर राजस्थान की चिंता और बढ़ गई। वर्तमान में खनौरी हैड पर 13200, चांदपुर हैड पर 14700, ओटू हैड 21000, घग्घर साइफन में 16602, नाली बेड में 5244 क्यूसेक पानी चल रहा है। नदी क्षेत्र में कब पानी बढ़ जाए, इसके बारे में अनिश्चितता के चलते सुरक्षा संबंधी सभी तैयारी पूर्ण की जा रही है। ताकि किसी तरह की आपात स्थिति से बचा जा सके। संभावित बाढ़ के खतरे को टालने को लेकर सभी तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। घग्घर डायवर्सन व नाली बेड के पटड़ों को मजबूत किया जा रहा है। जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता प्रदीप रुस्तगी ने नदी तटों की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे कार्यों का जायजा लिया तो वह अनियमितता देख बिफर पड़े। जीडीसी की आरडी 80 से लेकर आरडी 100 तक का निरीक्षण करने के बाद वह काफी खफा नजर आए। जीडीसी के पटड़ों की मजबूती का कार्य जिन अफसरों को सौंपा गया था, उनकी कार्यशैली से मुख्य अभियंता नाराज नजर आए। कुछ आरडी पर सुरक्षा दृष्टि से रखे जाने वाले मिट्टी के बैग भी मौके पर नहीं मिले। नदी क्षेत्र में बरसात के बाद पड़े घारे को भी ठीक से बंद नहीं किया गया था। मुख्य अभियंता रुस्तगी ने मौजूद अधिकारियों से कहा कि खतरा सिर पर है। लेकिन शर्म आनी चाहिए कि अभी तक नदी क्षेत्र के पटड़े भी पूरी तरह से दुरुस्त नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि मैं दोबारा शुक्रवार को निरीक्षण करने आऊंगा। 24 घंटों में पटड़े दुरुस्त नहीं हुए तो जिम्मेदार अभियंताओं को सबक सिखा दूंगा। कार्य में लापरवाही बरतने पर एक्सईएन नरेंद्र कुमार तथा एईएन निरंजनलाल को चार्जशीट थमाने की चेतावनी भी दी। मीडिया से बातचीत में मुख्य अभियंता ने कहा कि अभी आपदा से निपटने की तैयारी में लगे हैं। कुछ अभियंता स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ रहे थे। उनको चेता दिया है। नदी में पानी की मात्रा लगातार बढ़ रही है। कब पानी बढ़ जाए, इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसी स्थिति में सभी तरह के एहतियात बरत रहे हैं। नदी क्षेत्र के पानी को इंदिरागांधी नहर में डायवर्ट कर सकें, इसके लिए आईजीएनपी में क्लोजर का निर्णय भी लिया गया है।
अफसर सोए तो पब्लिक सोई ही रह जाएगी
निरीक्षण के दौरान मुख्य अभियंता ने कहा कि पंद्रह जून से पंद्रह अक्टूबर तक नदी में पानी की संभावित आवक मानी जाती है। इस अवधि में पटड़ों का मजबूत होना बेहद जरूरी है। इस बार 18 जून को जब सभी कार्य के टेंडर जारी कर दिए फिर अभी तक काम शुरू क्यों नहीं किए। इसका जवाब एक्सईएन व एईएन से लिखित में मांगा। मुख्य अभियंता रुस्तगी ने चेताया कि फर्जी बिल बनाकर पैसे जेब में डालने की प्रवृत्ति आप लोग बदल लें। तत्काल सभी अनुबंधित ठेकेदारों को मौके पर बुलाकर सुरक्षा संबंधी कार्य करवाने तथा मिट्टी के कट्टे नदी तटों के आसपास रखवाने का निर्देश दिया। कुछ जगह पिछले वर्ष के कटे-फटे मिट्टी के कट्टे मिलने पर मुख्य अभियंता बिफर पड़े। उन्होंने संभावित खतरे की तरफ इशारा करते हुए कहा कि यदि अफसर सोए रहेंगे तो फिर पब्लिक सोई ही रह जाएगी। इसलिए अभियंताओं को अपनी जिम्मेदारी समझकर सर्तक होकर काम करने की जरूरत है।
टूट चुका है बंधा
हनुमानगढ़ शहर में वर्ष 1995 में घग्घर के नाली बेड का बंधा टूटने से आधा शहर बाढ़ की चपेट में आ गया था।टाउन व जंक्शन के बीच में टूटे बंधे की वजह से काफी पानी आसपास में फैल गया था। ऐसे में जिस तरह से इस बार पानी बढ़ रहा है, उससे लोग बेचैन हो रहे हैं। नदी क्षेत्र में जीडीसी के नजदीक स्थित कुछ खेतों में जल प्लावन की स्थिति बन रही है। बिना मोटर के कुछ ट्यूबवैल पानी छोडऩे लगे हैं। वॉटर लेवल बढऩे की वजह से ऐसा हो रहा है। इससे आसपास के खेतों में जल भराव की स्थिति बन रही है। किसानों की फसल खराब होने की कगार पर पहुंच गई है। मुख्य अभियंता ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को तत्काल ऐसे प्वाइंट चिन्हित करके उसके आसपास मिट्टी के थैले लगाकर इसे बंद करवाने का निर्देश दिया।
Published on:
04 Sept 2025 06:48 pm
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