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विरोध में ग्रामीण, पक्ष में सरकार,हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी क्षेत्र में करोड़ों की लागत से लगने जा रहा देश का सबसे बड़ा इथेनोल प्लांट

हनुमानगढ़. सरकार स्तर पर हर तरफ प्रदूषण रोकने का शोर है। लेकिन फिर भी जिले में प्रदूषण का स्तर घटने का नाम नहीं ले रहा है। देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में हनुमानगढ़ काफी बार शामिल हो चुका है।

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हनुमानगढ़ जिले की टिब्बी क्षेत्र में तैनात पुलिस जाब्ता।

हनुमानगढ़ जिले की टिब्बी क्षेत्र में तैनात पुलिस जाब्ता।

-प्रदूषण बढऩे की आशंका में लोग कर रहे आंदोलन, किसानों में डर, इस फैक्टरी के संचालन से भूमि और वायु प्रदूषण बढऩे की आशंका
हनुमानगढ़. सरकार स्तर पर हर तरफ प्रदूषण रोकने का शोर है। लेकिन फिर भी जिले में प्रदूषण का स्तर घटने का नाम नहीं ले रहा है। देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में हनुमानगढ़ काफी बार शामिल हो चुका है। इस बीच जिले की टिब्बी तहसील के चक पांच आरके रोही राठीखेड़ा में करोड़ों की लागत से इथेनोल फैक्टरी का जबरन निर्माण शुरू करवाया जा रहा है। आसपास के लोग इस प्लांट के लगने का विरोध कर रहे हैं। पिछले पंद्रह महीने से इसके विरोध में धरना दे रहे लोगों के शैड को भारी पुलिस जाब्ते के बीच दो दिन पहले अचानक हटा दिया। तब से यहां पर माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।
अब तक प्रशासन ने इंटरनेट सेवा बंद कर रखी है। फैक्टरी लगाने के विरोध में आंदोलन कर रहे लोगों का कहना है कि इथेनॉल प्लांट लगने से क्षेत्र में प्रदूषण फैलेगा। इससे हवा और जमीन दोनों को नुकसान पहुंचेगा। आंदोलनकारी किसानों की आशंका को तब बल और मिलता है, जब हम जिला मुख्यालय पर लगी फैक्टरियों की तरफ नजर दौड़ाते हैं। हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय पर जंक्शन के रीको क्षेत्र से प्रवाहित हो रहा हजारों लीटर अपशिष्ट आसपास के क्षेत्र में बरसों से बदबू फैला रहा है। कोई सरकारी तंत्र इस प्रदूषण को ठोस तौर पर रोकने के लिए आगे नहीं आ रहा है। ऐसे में टिब्बी के आसपास के लोगों की आशंका को दरकिनार करके जबरन फैक्टरी का निर्माण करवाना कहां तक उचित होगा, यह तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल टिब्बी में जहां प्लांट का निर्माण कार्य शुरू करवाया गया है, वहां माहौल तनावपूर्ण है। करीब पांच सौ पुलिसकर्मियों का जाब्ता यहां तैनात किया गया है।

प्रदूषण में पहले ही सिरमौर
हनुमानगढ़ जिले में प्रदूषण का स्तर इतना खतरनाक हो गया है कि अब सरकार को ईंट भट्टों को साल में छह महीना बंद करने का निर्णय लेना पड़ा है। पराली जलाने वाले किसानों पर एफआईआर दर्ज करवाने तथा जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जा रही है। परंतु फिर भी प्रदूषण को रोकने में सरकारी तंत्र विफल ही रहा है। ऐसे में इतनी बड़ी इथेनोल फैक्टरी के संचालन के बाद आसपास की आबोहवा कैसे स्वच्छ रह सकेगी, इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। प्रदूषण मामले में हनुमानगढ़ जिला पहले ही देश में सिरमौर है।

एएसपी बोले, भ्रमित थे लोग
टिब्बी में जहां पर फैक्टरी लगाने का काम शुरू किया गया है, वहां पर दूसरे दिन भी काफी संख्या में पुलिस जवान तैनात रहे। एएसपी जनेश तंवर के अनुसार मौके पर तीन एएसपी, चार डीएसपी, 15 सीआई के नेतृत्व में आरएसी, बॉर्डर होमगार्ड व पुलिस के करीब 510 जवान निर्माण स्थल पर तैनात किए गए हैं। पुलिस की निगरानी में इथेनॉल फैक्टरी का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया गया है। एएसपी ने बताया कि कुछ लोगों ने झूठी अफवाहें फैलाकर आम नागरिकों व जनता को भ्रमित कर रखा था। लेकिन अब आम नागरिकों के समझ में यह बात आ गई है कि इस इथेनॉल फैक्टरी से इलाके का विकास होगा। आगामी स्थिति के अनुसार प्रशासन की ओर से निर्णय लिया जाएगा।

इतने महीनों में नहीं बनी बात
टिब्बी में इथेनॉल फैक्टरी के विरोध में बारह अगस्त 2025 को आंदोलन शुरू किया गया था। इस दिन किसानों ने फैक्टरी लगने वाली जगह के पास दिन रात धरना शुरू किया था। पिछले पंद्रह माह में कई बार वार्ता हुई। लेकिन फैक्टरी संचालन को लेकर सहमति नहीं बनी। आसपास के लोगों को आशंका है कि फैक्टरी से निकलने वाला अपशिष्ट आसपास की हवा, पानी व मिट्टी को प्रदूषित कर देगा।

जीरो क्यूसेक पानी डिस्चार्ज की शर्त
प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों से इस बारे में जब पड़ताल की गई तो उनका कहना था कि टिब्बी क्षेत्र में इथेनोल फैक्टरी संचालन को लेकर हमने जीरो क्यूसेक पानी डिस्चार्ज करने की शर्त पर फैक्टरी संचालन की अनुमति दी है। यह फैक्टरी कितना प्रदूषण फैलाएगी, इस बारे में अभी कुछ कहना उचित नहीं होगा। प्लांट लगा रही कंपनी ने अभी जो डीपीआर बनाई है, उसमें आधुनिक ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के साथ ही पीजो मीटर लगाने की बात कही है। इस मीटर का उपयोग भूजल स्तर को मापनेे में किया जाता है।