10 मार्च 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सिंचाई एक्ट में कई किसानों को नोटिस, भाखड़ा खंड में 142 किसानों की बारियां काटी

हनुमानगढ़. वक्त गुजरने के साथ ही जल संसाधन विभाग के अधिकारी आबियाना वसूली को लेकर किसानों के साथ सख्ती बरतने लगे हैं। दो से तीन फसलों का बकाया आबियाना जमा नहीं करवाने वाले किसानों की सिंचाई पानी की बारियां लगातार काटी जा रही है। अकेले भाखड़ा के दोनों खंड के 142 किसानों की पानी की […]

2 min read
Google source verification
हनुमानगढ़: जल संसाधन विभाग कार्यालय।

हनुमानगढ़: जल संसाधन विभाग कार्यालय।

हनुमानगढ़. वक्त गुजरने के साथ ही जल संसाधन विभाग के अधिकारी आबियाना वसूली को लेकर किसानों के साथ सख्ती बरतने लगे हैं। दो से तीन फसलों का बकाया आबियाना जमा नहीं करवाने वाले किसानों की सिंचाई पानी की बारियां लगातार काटी जा रही है। अकेले भाखड़ा के दोनों खंड के 142 किसानों की पानी की बारी काटने का आदेश अधिकारियों ने जारी किया है। इससे किसानों में बेचैनी बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि सरकार हर वर्ष ब्याज में छूट देने का आदेश जारी करती है।
लेकिन इस बार अब तक सरकार ने इसे लेकर किसी तरह का निर्णय नहीं लिया है। जानकारी के अनुसार भाखड़ा परियोजना में 29 करोड़ रुपए आबियाना वसूली का लक्ष्य विभाग को आवंटित किया गया है। इसमें 28 फरवरी 2026 तक दो करोड़ 92 लाख रुपए की वसूली हुई है। इसी तरह इंदिरागांधी नहर परियोजना में 23 करोड़ 66 लाख रुपए का लक्ष्य दिया गया है।
इसकी तुलना में अब तक दो करोड़ 35 लाख रुपए की वसूली हुई है। गंगकैनाल परियोजना में 13 करोड़ के वसूली लक्ष्य की तुलना में दो करोड़ 09 लाख रुपए की वसूली हुई है। इस तरह तय लक्ष्य की तुलना में अभी तक महज 11 प्रतिशत की वसूली हुई है। गत सप्ताह मुख्य अभियंता प्रदीप रुस्तगी ने सभी खंड के अधिकारियों की बैठक लेकर गांवों में शिविर लगाने तथा अधिकाधिक आबियाना वसूली करने का निर्देश दिया था।
इसके बाद विभागीय अधिकारी वसूली को लेकर सक्रिय नजर आ रहे हैं। तीनों नहर परियोजनों से करीब चार लाख किसान जुड़े हुए हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ जिले की खेती नहरी तंत्र पर निर्भर है। इस लिहाज से नामात्र की आबियाना राशि यदि किसान जमा करवा देते हैं तो नहरी तंत्र के संचालन में आसानी रहती है।
जो आबियाना वसूल किया जाता है, उसके अनुपात में नहर अध्यक्षों को कुछ राशि नहरों के रखरखाव के लिए भी आवंटित किया जाता है। नहरों का संचालन ठीक तरीके से होता रहे, इसके लिए किसानों को चाहिए कि वह आबियाना समय पर जमा करवाएं।

कइयों को अंतिम मौका
किसानों की सिंचाई बारी राजस्थान सिंचाई एवं जल निकास अधिनियम 1955 के उप नियम 10 (1) ई के तहत काटने की स्वीकृति प्रदान की जा रही है। उक्त किसानों को 25 फरवरी तक बकाया आबियाना जमा करवाने को लेकर पाबंद किया गया था। निर्धारित अवधि में बकाया आबियाना जमा नहीं करवाने पर इनकी बारी काटने की कार्रवाई की जा रही है। भाखड़ा परियोजना में इस वित्तीय वर्ष में 142 किसानों की बारी काटने की स्वीकृति प्रदान की गई है। चालू वर्ष में 31 मार्च तक का समय किसानों को दिया गया है। वहीं जिन किसानों के दो से तीन फसलों के बकाया चल रहे हैं, उन्हें पूर्व में नोटिस जारी करके अंतिम मौका दिया गया है। कुछ के बारी भी काटी गई है।

वसूली में जुटी है टीम
जिन किसानों ने बकाया आबियाना जमा नहीं करवाया है, उनको लगातार बकाया जमा करवाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। समय पर आबियाना जमा नहीं करवाने पर बारी काटी जा सकती है। मुख्य अभियंता ने वसूली को लेकर गत सप्ताह अधिकारियों की समीक्षा बैठक भी ली थी। इसमें सभी को गांवों में शिविर लगाकर आबियाना वसूली करने का निर्देश जारी किया गया है। नहरों के संचालन के लिए आबियाना वसूली जरूरी होता है।
-मनोज कुमार अरोड़ा, डीप्टी कलक्टर, जल संसाधन विभाग हनुमानगढ़।

बड़ी खबरें

View All

हनुमानगढ़

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग