पुलिस कंट्रोल रूम और तीन थानों में सूचना के बावजूद जिला पुलिस के अफसर फायरिंग से बने रहे अनजान
– संगरिया थाने का माहौल बदला-बदला सा, छाई चुप्पी
– वाटर पार्क प्रकरण में अब तक संगरिया एसएचओ, एक हैड कांस्टेबल व तीन कांस्टेबल हो चुके निलम्बित
हनुमानगढ़/संगरिया. माणकसर स्थित वाटर पार्क पर हथियारबंद लोगों के कब्जा करने तथा लोगों पर बेवजह फायरिंग व हमला करने की सूचना पीडि़त पक्ष ने पांच नवम्बर को ही पुलिस नियंत्रण कक्ष, सदर थाना, जंक्शन थाना तथा लिखित में संगरिया थाने में दे दी थी। इसके बावजूद ना केवल संगरिया का पूरा थाना बल्कि जिला पुलिस के अफसर भी अनजान बने रहे। हालांकि शनिवार को आईजी ने संगरिया थाने के एक हैड कांस्टेबल तथा तीन कांस्टेबल को घटना स्थल का मुआयना करने के बाद तथ्य छिपाने व गलत रिपोर्ट देने पर निलम्बित कर दिया। किन्तु ऐसा कैसे संभव है कि पुलिस नियंत्रण कक्ष और तीन-तीन थानों में सूचना के बाद पुलिस प्रशासन से यह बात छिपी रह जाए कि वाटर पार्क पर हथियारों से लैस लोगों ने कब्जा नहीं कर रखा है तथा वे लोगों पर फायरिंग नहीं कर रहे हैं। यदि तीन थानों और पुलिस नियंत्रण कक्ष में प्रारंभिक सूचना के बाद भी पुलिस अफसर यह कहते हैं कि उनको भनक भी नहीं थी तो फिर कैसे अफसर और कैसी निगरानी।
यह तो पुलिस मुख्यालय तक बात पहुंचने के बाद यहां पुलिस अफसर सक्रिय हुए हैं। इससे पहले तो पुलिस प्रशासन ने रहस्यमयी चुप्पी साध रखी थी। जब पुलिस मुख्यालय से संगरिया थाना प्रभारी पर निलम्बन का डंडा चला तो जिला पुलिस के अफसर चेते और सक्रियता दिखाते नजर आए। सीआई के बाद संगरिया थाने के एक हैड कांस्टेबल तथा तीन कांस्टेबल को निलम्बित कर दिया। मगर बात इतनी सी नहीं है। वाटर पार्क प्रकरण में पुलिस ने जो खामोशी अख्तियार कर रखी थी, वह बहुत सवाल पैदा करती है। यह तो गनीमत है कि इस विवाद में जिस तरह से कानून व्यवस्था को लतिया कर फायरिंग व हमले की घटना को अंजाम दिया गया, उसमें कोई जन हानि नहीं हुई। यदि कोई अनहोनी हो जाती तो कौन इसकी भरपाई करता, पुलिसकर्मियों के निलम्बन से भी फिर वो घाव नहीं भरते।
अब तक प्रकरण में क्या
गौरतलब है कि माणकसर वाटर पार्क में हथियारबंद लोगों को लेकर कई दिनों से डेरा डालने, लोगों पर फायरिंग करने तथा पुलिस की नकारात्मक भूमिका की शिकायत पुलिस मुख्यालय से की गई। इसके बाद शुक्रवार को संगरिया थाना प्रभारी हनुमानाराम बिश्नोई को पुलिस मुख्यालय ने निलम्बित कर दिया था। फिर शनिवार को आईजी ओमप्रकाश जांच को पहुंचे तथा शाम को संगरिया थाने के हैड कांस्टेबल शिव भगवान, कांस्टेबल संदीप कुमार, दलपत सिंह एवं पवन कुमार को निलम्बित कर दिया। इनको वाटर पार्क में फायरिंग, लड़ाई-झगड़े एवं लोगों को बंधक बनाने की सूचना की पड़ताल को भेजा गया था। चारों जनों को ‘पूर्णत: शांति’ की झूठी रिपोर्ट देने के चलते निलम्बित किया गया। माणकसर वाटर पार्क विवाद के पीछे कोई पैसे का लेन-देन है। करीब पांच से साढ़े पांच करोड़ रुपए की रकम बताई जाती है।
फायरिंग एवं जानलेवा हमले को लेकर मामला दर्ज
गांव मानकसर स्थित अकाशिया फन एंड वाटरपार्क में फायरिंग व जानलेवा हमला करने का आरोप लगाते हुए खतरिया कॉलोनी बीकानेर निवासी दीक्षान्त गोदारा पुत्र सुभाषचंद्र बिश्नोई एवं उसके साले गांव गिलावाला (टिब्बी) निवासी शुभकरण पुत्र ओमविष्णु बिश्नोई ने मामला दर्ज करवाया है। रिपोर्ट में बताया कि दीक्षान्त गोदारा पांच नवंबर शाम करीब पौने सात बजे हनुमानगढ़ से चौटाला की ओर जाते समय रास्ते में गांव मानकसर समीप स्थित वाटर पार्क पर खाने का सामान खरीदने गया था। वहां 3-4 लोग मौजूद थे। जिनमें एक के पास पिस्टल व बाकियों के पास देसी कट्टे थे। उन्होंने रोका तो शुभकरण ने खाने के सामान के बारे में पूछा। इतने में ही सामने से 30-40 लोग धारदार हथियारों के साथ आए और उन पर हमला कर दिया। कार आरजे 07सीसी0429 के सामने शीशे व साइड डोर की विंडो ग्लास व पीछे के शीशे तोड़ दिए। साला-जीजा घबरा गए। गाड़ी पीछे कर भगाई तो कांच की बोतलें फेंकी व फाईरिंग कर दी। मुश्किल से बचकर हनुमानगढ़ पुलिस थाना पहुंचे। जहां से उन्हें संगरिया थाना भेजा गया। पुलिस ने रिपोर्ट के आधार पर धारा 341, 427, 143 आईपीसी व 27 आम्र्स एक्ट में प्रकरण पंजीबद्ध किया है। एसआई शैलेशचंद मामले का अनुसंधान कर रहे हैं।
थाने का माहौल बदला
मानकसर वाटरपार्क प्रकरण की जांच एवं कार्रवाई में कथित लापरवाही बरतने पर पुलिसकर्मियों पर गाज गिरने के बाद यहां पुलिस थाना परिसर का माहौल बदला हुआ सा नजर आ रहा है। चार पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद थाने से रौनक गायब हो गई है। कार्रवाई के बाद अब सभी फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं। पुलिसकर्मी किसी के साथ खुलकर बातें करने से भी परहेज कर रहे हैं।