
कर्ज लेकर बनाई डिग्गियां, अब अनुदान का इंतजार, जिले में सात सौ डिग्गियों का बाइस करोड़ का अनुदान बकाया
-कृषि विभाग किसानों को दे रहा डिग्गी निर्माण की तकनीकी जानकारी
हनुमानगढ़. जिले में बूंद-बंदू सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग निरंतर रूप से किसानों को जागरूक कर रहा है। इसे देखते हुए किसानों का रुझान डिग्गी निर्माण के प्रति लगातार बढ़ा है। हनुमानगढ़ के नहरी जिला होने के कारण यहां के किसानों के लिए डिग्गी योजना काफी फायदेमंद साबित हो रही है। स्थिति यह है कि विभाग की ओर से तीन लाख रुपए का अनुदान मिलने की उम्मीद में जिले के सैंकड़ों किसानों ने जैसे-तैसे कर्ज लेकर खेतों में डिग्गियां बना ली है। लेकिन डिग्गी निर्माण करने के चार माह बाद भी अभी तक सरकार स्तर पर किसानों को अनुदान का भुगतान नहीं किया गया है। जिसके कारण किसान सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं। हनुमानगढ़ जिले में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत वर्ष २०१८-१९ में २००० डिग्गियां बनाने का लक्ष्य कृषि विभाग को आवंटित किया गया। इसके तहत करीब चार हजार किसानों ने आवेदन किया। वरीयता के आधार पर कृषि विभाग ने चयन कर दो हजार किसानों के खेत में डिग्गी निर्माण कार्य पूर्ण करवाया। इस तरह १३०० किसानों को अनुदान का भुगतान कर दिया गया। लेकिन करीब सात सौ किसानों को डिग्गी निर्माण के चार माह बीतने के बाद भी अनुदान नहीं मिला है। किसानों को अनुदान का भुगतान करने के लिए कृषि विभाग के स्थानीय अधिकारियों ने २२ करोड़ रुपए के बजट का प्रस्ताव सरकार को भिजवाया है। लेकिन अब तक बजट जारी नहीं होने के कारण किसानों को आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। कृषि उप निदेशक के अनुसार उच्च स्तर पर बजट आवंटन का प्रस्ताव भिजवाया है। जल्द बजट आवंटन करने का आश्वासन मिला है। प्रदेश के नहरी क्षेत्रों में चालू वर्ष में कोटा क्षेत्र में ८५००, बीकानेर में २२८५, श्रीगंगानगर में २५०० व हनुमानगढ़ में २००० डिग्गी निर्माण करवाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसमें ज्यादात्तर जगह डिग्गी निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है। अब हनुमानगढ़ सहित अन्य जगहों पर किसानों को बजट मिलने का इंतजार है।
संभाग की स्थित
नहरी जिला होने के कारण संभाग के किसानों का डिग्गी निर्माण के प्रति लगातार रुझान बढ़ा है। वर्तमान में बीकानेर संभाग में करीब २५ हजार से अधिक डिग्गियां है, जो कृषि विभाग की ओर से अनुदानित हैं। इनमें करीब आठ हजार हनुमानगढ़, नौ हजार श्रीगंगानगर, छह हजार बीकानेर व दो हजार डिग्गियां चूरू जिले में हैं। गत बरसों में डिग्गी अनुदान घटाने पर किसानों का रुझान अपेक्षित रूप से कम हो गया था। लेकिन अब अनुदान तीन लाख रुपए करने से किसान उत्साहित होकर आवेदन कर रहे हैं।
इसलिए कर रहे जागरूक
हनुमानगढ़ के कृषि उपनिदेशक जयनारायण बेनीवाल का कहना है कि नहरी क्षेत्रों में सिंचाई जल बचत के लिए किसान पक्की व प्लास्टिक डिग्गी का निर्माण कर रहे हैं। कई किसानों को डिग्गी निर्माण की जानकारी नहीं होती, इसलिए अनुभव की कमी के चलते मिस्त्री अपने हिसाब से तकनीकी सावधानियों को दरकिनार कर निर्माण कर देते हैं। इसके कारण कई जगह डिग्गी में लीकेज की शिकायतें आ रही है। जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है।
यह सावधानी बरते किसान
-कृषि विभाग के अधिकारी किसानों को पक्की डिग्गी का निर्माण करने के साथ ही प्लास्टिक डिग्गी का निर्माण नहीं करने की सलाह दे रहे हैं। क्योंकि प्लास्टिक डिग्गी में आठ-दस वर्ष बाद समस्याएं आने लगती है।
-पक्की डिग्गी निर्माण के समय नींव का मजबूती से भरना जरूरी होता है। क्योंकि पैंदे के चारों तरफ यदि नींव नहीं भरी जाती तो पानी के दबाव से साइड की ईंटे नीचे खिसक कर डिग्गी को क्षतिग्रस्त कर देती है।
-डिग्गी की एक साइड में मुख्य सीढ़ी का निर्माण जरूर करना चाहिए। सीढ़ी की चौड़ाई कम से कम तीन फीट रखनी चाहिए। सीढ़ी की प्रत्येक स्टेप के दोनों तरफ किनारों पर एक-एक खड़ी ईंट लगानी चाहिए।
-डिग्गी के चारों तरफ कम से कम जमीन से दो फीट ऊपर अच्छी मजबूत दीवार का निर्माण करना चाहिए। इस दीवार में दस-दस फीट की दूरी पर पिलरों में एंगल आवश्यक रूप से लगाना चाहिए।
Published on:
25 Jan 2019 12:20 pm
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