7 नवंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

आखिरकार जिला अस्पताल की ब्लड यूनिट को मिला लाइसेंस

https://www.patrika.com/rajasthan-news/
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

हनुमानगढ़

•

image

pawan uppal

•

Updated: 3 Aug 2018, 10:15 AM IST

district hospital

आखिरकार जिला अस्पताल की ब्लड यूनिट को मिला लाइसेंस

हनुमानगढ़.

जिला अस्पताल में महीनों से तैयार ब्लड कंपोनेट यूनिट (रक्त विभाजक) शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। अस्पताल प्रबंधन को यूनिट संचालन के लिए लाइसेंस मिल गया है। अब जल्दी ही विधिवत उद्घाटन कर यूनिट को शुरू करवाया जाएगा। जिला अस्पताल प्रशासन ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी है। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल (इंडिया) से मंजूरी के बाद लाइसेंसिंग अथोरिटी ड्रग्स कंट्रोलर, राजस्थान, जयपुर ने गुरुवार को ही जिला अस्पताल की तत्व विभाजक यूनिट के लिए लाइसेंस जारी किया।


यह लाइसेंस दो अगस्त 2018 से एक अगस्त 2023 तक के लिए जारी किया गया है। प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपकमित्र सैनी ने बताया कि आदेश की सॉफ्ट कॉपी मिल चुकी है। हार्ड कॉपी मिलने के बाद शेष कागजी प्रक्रिया पूर्ण कर यूनिट का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। अब लगभग प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। जल्द संचालन शुरू हो जाएगा। गौरतलब है कि जिला अस्पताल में ब्लड कंपोनेट यूनिट स्थापना की प्रक्रिया पिछले आठ साल से चल रही है। कांग्रेस व भाजपा दोनों की सरकारों ने इस यूनिट की स्थापना को लेकर घोषणाएं की। मगर यूनिट की स्थापना का कार्य अब जाकर सिरे चढ़ सका है।


बस लाइसेंस का ही था इंतजार
जिला अस्पताल में प्रस्तावित ब्लड कंपोनेंट यूनिट स्थापना की प्रक्रिया लम्बे समय से चल रही है। कांग्रेस व भाजपा दोनों पार्टियों की सरकार अपने कार्यकाल में इस यूनिट की स्थापना की घोषणा कर प्रशंसा तो हासिल की। लेकिन यूनिट की जल्द स्थापना को लेकर किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। राज्य सरकार ने वर्ष 2015 में प्रदेश के नौ अस्पतालों में तत्व विभाजक यूनिट स्थापित करने की घोषणा की थी। अब जाकर यूनिट शुरू होने की उम्मीद बनी है। इससे पहले कांग्रेस की केन्द्र सरकार ने जुलाई 2010 में हनुमानगढ़ सहित सात ब्लड बैंकों में सेपरेटर यूनिट (तत्व विभाजक) स्थापना को मंजूरी दी थी। लेकिन भवन बनने से ज्यादा कुछ नहीं हुआ।


दोनों ही सरकारें यूनिट शुरू नहीं करवा सकी। मजे की बात यह है कि जिला अस्पताल के सामने स्थित एक निजी अस्पताल ने ब्लड कंपोनेंट यूनिट स्थापित करवा ली है। उसके यूनिट की मंजूरी, लाइसेंस, स्टाफ सरीखे सब काम हो गए। बस जिला अस्पताल में बरसों से मंजूर यूनिट शुरू नहीं हो सकी थी।


नुकसान से भी बचत
थैलेसीमिया पीडि़तों को सिर्फ रक्त में लाल कणिकाओं मतलब पैकसेल की ही आवश्यकता होती है। तत्व विभाजन के अभाव में उनको ब्लड चढ़ाया जाता है। जबकि रक्त के अन्य तत्वों की उन्हें जरूरत नहीं होती। इससे उनके शरीर पर कई तरह के दुष्प्रभाव पडऩे लगते हैं। पैथोलॉजिस्ट हार्ट सर्जरी तथा बर्न केस में रोगी को केवल प्लाज्मा की जरूरत होती है। एनीमिया व ह्रदय रोगी को सिर्फ आरबीसी की आवश्यकता होती है। ब्लड के जरिए बिना जरूरत के कई तत्व रोगी के शरीर में चले जाते हैं, जो उनके लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं।


पत्रिका ने दी लगातार दस्तक
सरकार चाहे कांग्रेस की रही या भाजपा की। राजस्थान पत्रिका ने जिला अस्पताल में ब्लड कंपोनेट यूनिट की स्थापना में उदासीनता व सुस्ती बरतने को लेकर दोनों की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। चाहे सीएम का जिले में आना हो या चिकित्सा मंत्री। पत्रिका ने लगातार खबरें प्रकाशित कर जिम्मेदारों तक बात पहुंचाने का पूरा प्रयास किया। समय-समय पर जन प्रतिनिधियों व सरकार के नुमाईंदों के मन-मस्तिष्क पर दस्तक दी ताकि जिले के लोगों को राहत मिल सके। इस दस्तक का ही परिणाम रहा कि ब्लड कंपोनेट यूनिट के भवन, उपकरण, लाइसेंस अथोरिटी टीम के निरीक्षण आदि कार्य हुए। अब जाकर लाइसेंस जारी हुआ।


बहुत जरूरी यूनिट
‘ब्लड कंपोनेट प्रिपे्रशन यूनिट’ (तत्व विभाजक या सेपरेटर यूनिट) में ब्लड से आरबीसी, प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, फ्रोजन प्लाज्मा, डब्ल्यूबीसी आदि तत्व अलग कर लिए जाते हैं। रोगी को आवश्यकतानुसार इनमें से कोई तत्व चढ़ाया जाता है। खून से प्लाज्मा प्रोटीन भी अलग कर लिया जाता है। इससे रोगी पर उस ब्लड का रिएक्शन होने की आशंका खत्म हो जाती है। इसी तरह एमरजेंसी में ब्लड ग्रुप की जांच किए बिना ही रोगी को ‘ओ पॉजीटिव’ ब्लड के आरबीसी दिए जा सकते हैं। इसमें एंटीजन व एंटीबॉडी नहीं होने से शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। एक यूनिट खून कई रोगियों के काम आ जाता है। बैंक में ब्लड की उपलब्धता व खपत का गणित भी नहीं गड़बड़ाता।


जल्द होगा यूनिट का संचालन शुरू
जिला अस्पताल की ब्लड कंपोनेट यूनिट के लिए लाइसेंस जारी हो चुका है। लगभग प्रक्रियाएं पूर्ण हो चुकी है। आदेश की हार्ड कॉपी मिलते ही कुछ सामान्य कार्य निपटा कर यूनिट का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। निश्चित तौर पर इससे रोगियों को बहुत राहत मिलेगी। बेहतर ढंग से इलाज हो सकेगा। रोगियों का समय व पैसा भी बचेगा।
डॉ. दीपकमित्र सैनी, पीएमओ, जिला अस्पताल।