गांधीगिरी का असर, बैंक प्रबंधन ने भेजा वार्ता का न्यौता
– एसबीआई शाखा के समक्ष रिटायर्ड बैंक कर्मचारी का ग्यारहवें दिन धरना जारी
हनुमानगढ़. एसबीआई की जंक्शन धानमंडी स्थित शाखा के सामने रिटायर्ड बैंक कर्मचारी का धरना शुक्रवार को ग्यारहवें दिन जारी रहा। बैंक प्रबंधन पर पूर्व बैंक कर्मचारी की गांधीगिरी का असर पड़ा और उसको वार्ता के लिए न्यौता भेजा। अब शुक्रवार दोपहर बाद बैंक के एजीएम के साथ वार्ता होगी। वार्ता के आधार पर धरने को जारी रखने को लेकर निर्णय किया जाएगा। वहीं बार संघ हनुमानगढ़ भी धरने को समर्थन दे चुका है। साथ ही बैंक के एजीएम से मिलकर कानून सम्मत कार्रवाई नहीं करने पर धरने में शामिल होने की चेतावनी दी जा चुकी है। सूचना का अधिकार जागृति मंच संस्थान के जिलाध्यक्ष प्रवीण मेहन ने धरना स्थल पहुंच कर समर्थन दिया। अपनी मांगों से संबंधित बैनर लेकर धरने पर डटे रिटायर्ड कर्मचारी जेनेन्द्र कुमार झाम्ब निवासी जंक्शन ने बताया कि यह सम्मान की लड़ाई है। किसी एक अफसर की मनमर्जी से व्यवस्था नहीं चल सकती। सिस्टम को कानून सम्मत तरीके से ही चलाना होगा। उन्होंने कहा कि बैंक प्रबंधन ने उनके मामले में मनमर्जी बरती। बैंक प्रबंधन कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के समय जो सराहना पत्र देता है, वह मुझे क्यों नहीं दिया गया, इसका कारण बताए। यदि कोई वजह है तो तथ्यों के साथ बताए। यूं मनमर्जी स्वीकार नहीं की जाएगी। जेनेन्द्र झाम्ब ने बताया कि 37 साल की नौकरी के बाद एसबीआई की जंक्शन धानमंडी शाखा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी। सेवानिवृत्ति के समय बैंक की परम्परा के अनुसार उनको बैंक प्रबंधन ने मनमर्जी बरतते हुए बिना कोई उचित कारण के सराहना पत्र नहीं दिया। इसके अलावा भुगतान, भत्ते आदि संबंधी कई दिक्कतों में उलझा दिया गया। इसलिए तमाम मांगों संबंधी बैनर लेकर बैंक कार्यालय के समक्ष पूर्व में दो बार धरना लगाया। इसके बाद बैंक प्रबंधन ने काफी हद तक उन्हें नियम सम्मत बकाया भत्तों-परिलाभ का भुगतान किया। सेवानिवृत्ति पर बैंक का नियम है कि कर्मचारी को उसकी बैंक सेवाओं की सराहना का पत्र दिया जाए। लेकिन उन्हें यह पत्र नहीं दिया गया। इस संबंध में चार दिन पहले बैंक अधिकारियों को सूचित किया था। लेकिन सराहना पत्र नहीं मिलने पर वे मंगलवार से बैंक के सामने अपना दुखड़ा लेकर धरने पर बैठने को मजबूर हैं।