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हनुमानगढ़

फूड इंस्पेक्टर का टोटा दूर करने का प्रयास, प्रदेश में 33 को सौंपा अस्थाई जिम्मा

हनुमानगढ़. खाद्य एवं पेय पदार्थों में मिलावट के खिलाफ कानून का डंडा तेजी से चलाने के लिए प्रदेश को 33 खाद्य सुरक्षा अधिकारी मिले हैं। फूड इंस्पेक्टर का टोटा दूर करने के लिए यह प्रयास किया गया है।

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फूड इंस्पेक्टर का टोटा दूर करने का प्रयास, प्रदेश में 33 को सौंपा अस्थाई जिम्मा
– चिकित्सा विभाग के कर्मचारियों को प्रशिक्षण देकर खाद्य सुरक्षा अधिकारी का कार्य संपादित करने को किया अधिसूचित
– हनुमानगढ़ एवं श्रीगंगानगर जिले को मिले एक-एक फूड इंस्पेक्टर
हनुमानगढ़. खाद्य एवं पेय पदार्थों में मिलावट के खिलाफ कानून का डंडा तेजी से चलाने के लिए प्रदेश को 33 खाद्य सुरक्षा अधिकारी मिले हैं। फूड इंस्पेक्टर का टोटा दूर करने के लिए यह प्रयास किया गया है। हालांकि यह नियुक्ति अस्थाई तौर पर ही की गई है। मगर नि:संदेह इससे खाद्य एवं पेय पदार्थों के सैंपल संग्रहित करने, खाद्य वस्तु निर्माण तथा विक्रय प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करने आदि की कार्रवाई में और तेजी आ सकेगी।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण, आयुक्त की ओर से जारी आदेश के अनुसार खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 38 में निहित प्रावधानों के तहत खाद्य सुरक्षा अधिकारी का कार्य संपादित करने के लिए प्रदेश में 33 प्रशिक्षण प्राप्त विभागीय कर्मचारियों को अधिसूचित किया गया है। आरपीएससी, अजमेर से नियमित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के उपलब्ध होने अथवा एक वर्ष की अवधि, जो भी पहले हो तब तक के लिए उपरोक्त विभागीय कर्मचारियों को खाद्य सुरक्षा अधिकारियों का कार्य करने को अधिसूचित किया गया है।
कहीं एक तो कहीं चार
जानकारी के अनुसार हनुमानगढ़ के लिए संदीप कुमार तथा श्रीगंगानगर के लिए हेतराम को अधिसूचित किया गया है। इसके अलावा सर्वाधिक चार नागौर जिले के लिए अधिसूचित किए गए हैं। वहीं अजमेर, भरतपुर व जयपुर में दो-दो खाद्य सुरक्षा अधिकारी लगाए गए हैं। खास बात यह कि समस्त विभागीय कर्मचारी अपने मूल पद के समान वेतनमान पर ही राजकार्य करेंगे। उनको किसी प्रकार की वेतन विसंगति का लाभ देय नहीं होगा।
जिले में और आएगी तेजी
जिले में खाद्य सुरक्षा अधिकारी के तीन पद स्वीकृत हैं। इन पद पर रफीक मोहम्मद एवं सुदेश गर्ग पहले से कार्यरत हैं। अब संदीप कुमार को अधिसूचित किए जाने के बाद सभी पद भर गए हैं। इससे जिले में सैंपल कलेक्शन, निरीक्षण आदि निरंतर बढ़ रहा है। इस साल मार्च के आखिर तक 165 सैंपल लिए जा चुके थे। जबकि कुछ बरस पहले तक इतने सैंपल एक साल में भी नहीं लिए जाते थे।