
महापंचायत में किसानों ने भरी हुंकार
महापंचायत में किसानों ने भरी हुंकार
-मांगों पर गौर नहीं करने की स्थिति में आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी
-एकजुट होकर अपने हकों को लेकर आवाज बुलंद करने की कही बात
हनुमानगढ़. भारतीय किसान यूनियन एकता व संयुक्त किसान मोर्चा के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को जंक्शन धानमंडी में किसानों की महापंचायत हुई। इसमें वक्ताओं ने किसानों को एकजुट होकर अपने हकों के लिए आवाज बुलंद करने की बात कही। वक्ताओं ने कहा कि फसल खराब होने पर सरकार किसानों को समय पर मुआवजा नहीं देती। बीमा क्लेम भी समय पर जारी नहीं होता।
इस स्थिति में किसानों की स्थिति दयनीय हो रही है। किसानों की समस्याएं सरकारों की समझ में आए, इसके लिए एकजुट होकर आंदोलन करने की बात कही। महापंचायत में किसान नेता जगजीत सिंह, शिव कुमार कक्का, अभिमन्यु कोहाड़, बलदेव सिरसा, सुखजिंदर खोसा, प्रो. ओम जांगू, जरनैल सिंह, महंगा सिंह, इंदरजीत सिंह पन्नीवाला, रेशम सिंह मानुका, कुलविंदर सिंह ढिल्लो आदि मौजूद रहे। इस मौके पर सभी वक्ताओं ने लखमीपुर खीरी नरसंहार के दोषी आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने की मांग की। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार किसानों को उचित मूल्य देने, देश के किसानों का सम्पूर्ण कर्जा मुक्त करने, केन्द्र सरकार के भूमि अधिग्रहण कानून 2013 में किए गए बदलावों को वापिस लेने, एमएसपी गारंटी कानून बनाने, बिजली कनेक्शन बिल 2022 वापिस लेने, पीएम फसल बीमा योजना के तहत किसानों का बकाया मुआवजा जारी करने, गन्ना किसानों की बकाया राशि का भुगतान करने, पाले से खराब हुई फसलों का मुआवजा देने आदि मांगों को मजबूत किया। प्रो. ओम जांगू ने कहा कि जनवरी माह में पाला अधिक पडऩे से किसानों की फसल खराब हो गई है। खराबे की रिपोर्ट सार्वजनिक करके तत्काल राहत देने की मांग की। इस मौके पर सभी ने सीएम के नाम ज्ञापन भी भेजा। जिला परिषद डायरेक्टर मनीष मक्कासर, अपरजोत बराड़, रायसाहब चाहर, भाखड़ा सिकान संगठन के अध्यक्ष रायसिंह चाहर आदि मौजूद रहे।
पुलिस का जाब्ता रहा तैनात
किसानों की महा पंचायत को देखते हुए मंडी परिसर में पुलिस का भारी जाब्ता तैनात रहा। तय समय पर हालांकि कार्यक्रम शुरू नहीं हुआ। लेकिन जैसे ही धीरे-धीरे किसान महापंचायत में पहुंचने लगे, खेती व किसानी के प्रति माहौल बनने लगा। किसान एकता के नारे गूंजने लगे।
राजनीति नहीं करनी
महापंचायत के दौरान किसान नेताओं ने कहा कि किसान हित को सर्वोपरि मानते हुए किसानों को चाहिए कि वह अपने हक की आवाज को बुलंद करे। वक्ताओं ने कहा कि किसान राजनीति की बजाय अपने हक के लिए संघर्ष करेंगे तो खेती-किसानी की हालत बेहतर हो सकती है।
Published on:
09 Feb 2023 12:37 pm
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