जिला अस्पताल में पांच पीडियाट्रिशन, शिशु वार्ड में वेंटिलेटर नहीं
– गंभीर स्थिति में शिशु का नहीं हो पाता इलाज
– विभाग और राज्य सरकार को भी करवा चुके अवगत
हनुमानगढ़. टाउन स्थित महात्मा गांधी राजकीय जिला चिकित्सालय में पांच पीडियाट्रिशन है। लेकिन शिशु वार्ड में एक भी वेंटिलेटर नहीं होने के कारण गंभीर स्थिति में इलाज संभव नहीं है। इस संबंध में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व चिकित्सा मंत्री को भी जिला अस्पताल प्रशासन व विधायक चौधरी विनोद कुमार को अवगत करवाया जा चुका है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हैरत की बात है कि जिला अस्पताल प्रशासन ने राजस्थान रिलीफ सोसायटी फंड से बीस लाख रुपए की लागत से एक वेंटिलेटर खरीदने की कार्यवाही भी कर ली। स्वीकृति के लिए फाइल जयपुर भेजे हुए दो माह के करीब हो चुके हैं। वेंटिलेटर की सप्लाई श्रीगंगानगर की कंपनी करेगी। इसके लिए दिल्ली की कंपनी ने भी आवेदन किया था। लेकिन मापदंडों के अनुरूप नहीं होने के कारण जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से गठित कमेटी ने आवेदन निरस्त कर दिया। जानकारी के अनुसार वेंटिलेटर खरीदने के लिए दो आवेदन जमा हुए थे। इनमें से एक एजेंसी दिल्ली व दूसरी श्रीगंगानगर की थी। उल्लेखनीय है कि जिला अस्पताल प्रशासन ने आरएमआरएस की बैठक में दो वेंटिलेटर खरीदने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन बैठक में एक ही मशीन खरीदने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके तहत यह मशीन खरीदने की कार्यवाही की जा रही है। उधर, निदेशालय स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल प्रशासन से स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार करने के लिए उपकरणों की कमी के बारे में जानकारी मांगी गई थी। इस पत्र के माध्यम से जिला अस्पताल प्रशासन ने पांच वेंटिलेटर की डिमांड भेजी थी। लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला। यह डिमांड कोविड की दूसरी लहर के दौरान भी हनुमानगढ़ जिला अस्पताल ने निदेशालय को भेजी थी। इसके बावजूद सुनवाई नहीं हुई।
मृत्यु दर में नहीं आ रही कमी
जिला अस्पताल अपने स्तर पर भी वेंटिलेटर की सप्लाई नहीं ले पा रहा। एक वेंटिलेटर से एक समय में एक शिशु का इलाज किया जा सकता है। ऐसे में अन्य शिशु को भर्ती करने की बजाए, रैफर किया जाएगा। यह वेंटिलेटर खराब हो जाता है तो ऐसे में शिशु को आनन-फानन में रैफर करने का एक मात्र विकल्प होगा। इसके आधार पर जिला अस्पताल प्रशासन ने शिशु वार्ड के लिए पांच वेंटिलेटर की डिमांड भेजी है। हैरत की बात है कि अस्पताल प्रशासन ने कोविड के समय शिशु वार्ड के लिए पांच वेटिलेटर की डिमांड राज्य सरकार को भेजी थी। इस संबंध में राज्य सरकार ने कोई संज्ञान नहीं लिया और फिर से संसंधान की आवश्यकता होने पर डिमांड भेजने के निर्देश दिए हैं। अभी तक इसका जवाब भी नहीं मिला है।
रैफर करने का दौर जारी
वेंटिलेटर के अभाव में नवजात की स्थिति गंभीर होने पर हायर सेंटर या फिर प्राइवेट अस्पताल में रैफर करना ही एक मात्र विकल्प है। जबकि जिला अस्पताल में पांच शिशु रोग विशेषज्ञ हैं। लेकिन वेंटिलेटर नहीं होने के कारण नवजात की स्थिति गंभीर होने पर रैफर किया जाता है। गत वर्ष में अस्पताल प्रशासन ने राजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी के खाते से बीस लाख रुपए का वेंटिलेटर खरीदने का निर्णय लिया था। अस्पताल प्रशासन ने शिशु आईसीयू बनाने के लिए मुख्य संसाधन वेंटिलेटर है। इसलिए अस्पताल प्रशासन ने पूर्व की तरह इस बार भी पांच वेंटिलेटर की डिमांड भेजी है और दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर 20 लाख रुपए की खरीद करने की तैयारी शुरू कर दी थी। वर्तमान में एनआईसीयू में केवल सीपेप की सुविधा की है। इस सीपेप के जरिए प्रेशर से नवजात को ऑक्सीजन दी जाती है। नवजात स्वत: ऑक्सीजन लेने में सक्षम नहीं होने पर वेंटिलेटर की आवश्यकता होती है। यही स्थिति जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड की है। बच्चा वार्ड में भी वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है। जिले के प्राइवेट अस्पतालों में यह सुविधा केवल एक या दो अस्पताल में ही है। लेकिन चिकित्सा विभाग ने अभी तक एक भी वेंटिलेटर नहीं दिया।
*******************************************************