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‘एथेनोल फैक्टरी आंदोलन की आग तेज, वक्ता बोले, यह लड़ाई फैक्टरी की नहीं, खेती-किसानी बचाने की’

हनुमानगढ़ जिले की टिब्बी क्षेत्र में किसान आंदोलन को लेकर किसान नेताओं ने एक बार फिर सरकार और प्रशासन को साफ संदेश दिया है कि यह संघर्ष केवल किसी एक फैक्टरी के विरोध तक सीमित नहीं है।

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हनुमानगढ़: संगरिया में किसानों की महापंचायत में मौजूद किसान।

हनुमानगढ़: संगरिया में किसानों की महापंचायत में मौजूद किसान।

हनुमानगढ़ जिले की टिब्बी क्षेत्र में किसान आंदोलन को लेकर किसान नेताओं ने एक बार फिर सरकार और प्रशासन को साफ संदेश दिया है कि यह संघर्ष केवल किसी एक फैक्टरी के विरोध तक सीमित नहीं है। यह खेती, जमीन और किसानों के भविष्य की लड़ाई है। बुधवार को संगरिया स्थित धानमंडी में हुई किसानों की महापंचायत में वक्तओं ने हनुमानगढ़ जिले के किसानों की एकजुटता की सराहना की। किसान नेताओं ने धारा 163 लागू होने के बावजूद तीसरी बार सफल आयोजन करने पर किसानों को बधाई दी। किसान नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी भी किसान को डराने या दबाने की कोशिश की गई, तो पूरा हनुमानगढ़ जिला एकजुट होकर विरोध करेगा। स्पष्ट किया कि चाहे किसान हनुमानगढ़ का हो, संगरिया का या टिब्बी का—सभी किसान एक साथ खड़े हैं। इस एकजुटता के लिए उन्होंने जिले के किसानों और आंदोलन में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। सभा में वक्ताओं ने सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। आरोप लगाया कि टिब्बी क्षेत्र में शांतिपूर्ण आंदोलन को रोकने के लिए प्रशासनिक दबाव बनाया गया और किसानों को हिरासत में लिया गया। इसके विरोध में पूरे जिले के किसानों ने अपनी नाराजगी जाहिर की और आंदोलन को और तेज किया। वक्ताओं ने सरकार के मंत्रियों के हालिया बयानों का हवाला देते हुए कहा कि किसानों की सहमति के बिना फैसले थोपे जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एमओयू लगातार आगे बढ़ाए जा रहे हैं, जबकि किसानों और जनप्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया जा रहा। किसान नेताओं ने दो टूक कहा कि जब तक किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं सुना जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। किसी भी स्तर पर समझौता खेती और किसानी के हितों से खिलवाड़ करके नहीं किया जाएगा। किसान नेता जगतार सिंह उग्राहां, मनजीत धनेर, जोगेन्द्र उग्राहां, बलवान पुनियां, मंगेज चौधरी रेशम सिंह मानुका, भाना सिद्धू, जगजीत सिंह जग्गी, सुभाष गोदारा मक्कासर, रंजीत राजु , अशोक चौधरी, ओम जांगू,  मनदीप मान,  रघुवीर वर्मा, रामेश्वर वर्मा, राष्ट्रीय किसान संगठन प्रदेश अध्यक्ष जसवीर भाटी आदि प्रमुख रूप से आंदोलन में शामिल रहे। फैक्टरी का एमओयू रद्द करने तथा किसानों के खिलाफ दर्ज मामले को वापस लेने की मांग को लेकर किसान आंदोलन कर रहे हैं।

इसलिए कर रहे विरोध
सभा में किसान नेताओं ने कहा कि एथेनॉल फैक्टरी से क्षेत्र की खेती, भू-जल और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पडऩे की आशंका है। आरोप लगाया कि बिना किसानों की सहमति के ऐसे उद्योग लगाए जा रहे हैं, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

प्रशासन रहा सतर्क
किसानों की महापंचायत को देखते हुए संगरिया में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहा। शहर के प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल तैनात रहे। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गईै। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निषेधाज्ञा लागू किया गया। एहतियात के तौर पर इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई।